होलिका दहन सोमवार रात को मगर रंगों वाली होली खेलेंगे बुधवार को, होली पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण 2026: सूतक काल, सावधानियाँ और आध्यात्मिक महत्व -आचार्य दिनेश

पीतांबरा पीठाधीश्वर स्वामी दिनेश जी महाराज ने बताया कि वर्ष 2026 का प्रथम चंद्र ग्रहण आगामी 3 मार्च 2026, मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। विशेष बात यह है कि इसी दिन रंगों का त्योहार होली भी मनाया जाएगा। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा, जिसके कारण इसका धार्मिक और सूतक प्रभाव मान्य होगा। एवं रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।

ग्रहण का समय और गणना
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस ग्रहण की समयावधि और सूतक काल का विवरण निम्नवत है –
सूतक काल प्रारंभ: 3 मार्च 2026, प्रातः 09:07 बजे से।
ग्रहण का समय : 3 मार्च 2026, सायं 06:07 बजे से।
सायं 06:26 बजे, एवं ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति): सायं 06:45 बजे।
चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पूर्व लग जाता है। अतः प्रातः 9 बजकर 7 मिनट से ही मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।

सूतक काल में वर्जित कार्य (क्या न करें)
शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल को एक “अशुद्ध” समय माना जाता है जिसमें वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। इस दौरान निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:
भोजन और शयन: सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन करना वर्जित है। बीमार, वृद्ध और बच्चों को छोड़कर अन्य व्यक्तियों को इस नियम का पालन करना चाहिए। साथ ही, ग्रहण के दौरान सोने से भी बचना चाहिए।
मूर्ति स्पर्श और पूजा: सूतक लगते ही घर के मंदिरों को पर्दे से ढक देना चाहिए। इस दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करना सख्त मना है।
धारदार वस्तुओं का प्रयोग: विशेषकर गर्भवती महिलाओं को सुई, चाकू, कैंची जैसी धारदार वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
तुलसी के पत्ते तोड़ना: सूतक काल में तुलसी के पौधे को स्पर्श करना या उसके पत्ते तोड़ना वर्जित है।
होली का उत्सव: चूंकि इस वर्ष होली और ग्रहण एक ही दिन हैं, अतः विद्वानों का मत है कि सूतक लगने से पूर्व ही रंगों की होली संपन्न कर लेनी चाहिए। सूतक काल के दौरान रंग खेलना या शोर-शराबा करना आध्यात्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
ग्रहण काल में करने योग्य कार्य (क्या करें)
ग्रहण का समय केवल निषेध का नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और मंत्र सिद्धि का महापर्व होता है। इस दौरान किए गए जप का फल अनंत गुना प्राप्त होता है:
मंत्र जप और ध्यान: ग्रहण के दौरान अपने इष्ट देव का ध्यान करें। मंत्र जप मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करता है।

खाद्य पदार्थों की सुरक्षा: सूतक लगने से पूर्व ही दूध, दही, अचार और पीने के पानी में कुशा (घास) या तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। मान्यता है कि इससे ग्रहण की किरणों का दुष्प्रभाव भोजन पर नहीं पड़ता।
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के भीतर रहना चाहिए और भगवान का नाम स्मरण करना चाहिए।
दान का संकल्प: ग्रहण के दौरान दान करने का संकल्प लेना चाहिए, जिसे ग्रहण समाप्त होने के बाद क्रियान्वित किया जाता है।
मोक्ष के पश्चात शुद्धिकरण प्रक्रिया
सायं 06:45 बजे ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) के बाद निम्नलिखित कार्य अनिवार्य हैं:
स्नान और दान: ग्रहण के तुरंत बाद पूरे परिवार को स्नान करना चाहिए। सफेद वस्तुओं (जैसे चावल, दूध, चीनी या चांदी) का दान करना विशेष फलदायी है क्योंकि चंद्र ग्रहण का सीधा संबंध चंद्रमा और मन से होता है।
घर का शुद्धिकरण: पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। मंदिर की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराकर नवीन वस्त्र पहनाएं और फिर आरती करें।
ताजा भोजन: ग्रहण समाप्त होने के बाद ही ताजा भोजन बनाकर ग्रहण करना चाहिए। सूतक से पहले बना हुआ भोजन (यदि उसमें तुलसी न डाली गई हो) त्याग देना चाहिए।
चंद्र ग्रहण के कारण मानसिक तनाव या अज्ञात भय महसूस हो सकता है, इसलिए प्राणायाम और सकारात्मक चिंतन पर बल दें।

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