

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य में भांग और कैनबिस की खेती के लिए इको-सिस्टम विकसित करने की अनुमति संबंधी अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जब इसी विषय पर पूर्व में जनहित याचिका खारिज हो चुकी है, तो उसी मुद्दे को पुनः नए रूप में प्रस्तुत कर सुनवाई नहीं कराई जा सकती।
मामले में बिलासपुर निवासी डॉ. सचिन अशोक काले ने अपील दायर करते हुए राज्य सरकार को उनके आवेदन पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की थी। उन्होंने औद्योगिक भांग की खेती की अनुमति एनडीपीएस एक्ट और संवैधानिक प्रावधानों के तहत मांगी थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उन्होंने केवल अपने आवेदन पर विचार करने का आग्रह किया था, जिसे सिंगल बेंच द्वारा खारिज कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता पूर्व में भी इसी मांग को लेकर जनहित याचिका दायर कर चुके हैं, जिसे 7 जुलाई 2025 को डिवीजन बेंच द्वारा खारिज किया जा चुका है। उन्होंने दलील दी कि बार-बार एक ही मुद्दे को अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।
