प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: नए कर्मचारियों को 15 हजार, नियोक्ताओं को भी 3 हजार का प्रोत्साहन, मार्च से 7500 रुपये की पहली किस्त जारी, 6.45 लाख युवाओं को लाभ


बिलासपुर। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत नए नौकरीपेशा युवाओं को दी जाने वाली 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की पहली किस्त मार्च से जारी की जाएगी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation) के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले 10 जिलों के करीब 6 लाख 45 हजार 378 कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
योजना के अनुसार कुल 15 हजार रुपये की सहायता राशि दो किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त के रूप में 7500 रुपये पात्र कर्मचारियों के आधार लिंक बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाएंगे। यह योजना 1 अगस्त 2024 से प्रभावी है और इसका उद्देश्य तकनीकी मशीनरी की जगह श्रमिक आधारित रोजगार को बढ़ावा देना है।
‘स्कीम ए’ और ‘स्कीम बी’ के तहत मिलेगा लाभ
योजना में पहली बार नौकरी जॉइन करने वाले और जिनका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) पहली बार जनरेट हो रहा है, उन्हें ‘स्कीम ए’ में रखा गया है। वहीं नौकरी छोड़कर दोबारा जॉइन करने वाले कर्मचारियों को ‘स्कीम बी’ के तहत लाभ मिलेगा। पात्रता के लिए कर्मचारी का मासिक वेतन 1 लाख रुपये या उससे कम होना जरूरी है। साथ ही संबंधित संस्थान द्वारा नियमित रूप से पीएफ अंशदान जमा किया जाना अनिवार्य है।
नियोक्ताओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (द्वितीय) देबाशीष चांद के अनुसार यह योजना न केवल कर्मचारियों बल्कि नियोक्ताओं के लिए भी लाभकारी है। सर्विस सेक्टर की संस्थाएं यदि अतिरिक्त नियुक्तियां करती हैं तो उन्हें प्रति कर्मचारी 3 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दो वर्ष तक दी जाएगी। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए यह लाभ चार वर्ष तक मिलेगा।
वर्तमान में बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत 10,491 संस्थान पंजीकृत हैं। विभाग का लक्ष्य 3 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों को पीएफ अंशदान के दायरे में लाना है।
भुगतान प्रणाली होगी सेंट्रलाइज्ड
ईपीएफओ अपनी भुगतान प्रणाली को भी सेंट्रलाइज्ड कर रहा है। इससे सेवानिवृत्ति के बाद पीएफ निकालने के लिए कर्मचारियों को पुराने कार्यस्थल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे देश के किसी भी हिस्से से डिजिटल माध्यम से अपना भुगतान प्राप्त कर सकेंगे।
यह योजना सामान्य क्षेत्रों के लिए 31 जुलाई 2027 तक प्रभावी रहेगी, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के लिए इसकी समय-सीमा 31 जुलाई 2029 तक निर्धारित की गई है।

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