

बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि केवल दूसरी शादी या तथाकथित ‘चूड़ी विवाह’ के आरोपों के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने जशपुर निवासी एक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
मामले के अनुसार, दंपती का विवाह मई 2009 में हुआ था और उनकी तीन बेटियां हैं। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने उसके साथ प्रताड़ना की और दूसरी महिला को पत्नी के रूप में रखकर उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद उसने भरण-पोषण की मांग की।
वहीं पति ने अदालत में तर्क दिया कि पत्नी स्वेच्छा से घर छोड़कर चली गई और बिहार में किसी अन्य व्यक्ति के साथ ‘चूड़ी विवाह’ कर लिया है, इसलिए वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है।
हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद ही भरण-पोषण की राशि तय की है। केवल आरोपों के आधार पर पत्नी के वैधानिक अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
