

18 साल के लड़के को 20 साल की लड़की से प्यार हो गया। ग्रामीण होने के बावजूद नए चलन से दोनों लिव इन में रहने लगे । इधर वेलेंटाइन वीक के दौरान प्यार ने उफान मार तो लड़की में अपनी प्रेमी के साथ विवाह करने की इच्छा बलवती होती चली गई लेकिन जब घर वालों ने समझाया कि उसकी उम्र शादी के लायक नहीं हुई और वह 3 साल और इंतजार कर ले तो उसे इतना इंतजार नहीं किया गया ।
इंतजार तो लड़की से भी नहीं हुआ, जिसने शादी न होने पर फांसी लगा ली। अपनी गर्लफ्रेंड को फांसी के फंदे पर लटकता देख बॉयफ्रेंड ने भी मौत को गले लगा लिया । वेलेंटाइन वीक पर यह हृदयविदारक घटना गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में हुई।

जिले के पनकोटा गांव में अलग घर लेकर अनीता सिंह और कृष्णा सिंह रह रहे थे । अनीता सिंह हमाली गांव की रहने वाली थी तो वही कृष्ण सिंह अमलिहा गांव का था। 2 साल पहले एक रिश्तेदार की शादी में दोनों की आंखें मिली। फोन नंबर एक्सचेंज हुआ और फिर बातचीत होने लगी तो दोस्ती प्यार में तब्दील हो गई।
दोनों का मिलना जुलना साथ रहना देखकर लड़की के घर वाले भी शादी के लिए मान गए। परिजनों ने सरकार के सामूहिक विवाह में शादी के लिए आवेदन दिया था लेकिन लड़के की उम्र कम होने की वजह से फॉर्म रिजेक्ट हो गया। लड़की शादी की योग्य थी। इस घटना के बाद से दोनों मानसिक रूप से परेशान थे। शादी में देरी होने पर परिजनों की सहमति से दोनों ने गांव में एक अलग घर ले लिया था , जहां वे पिछले तीन महीने से रह रहे थे। इस बीच न जाने ऐसा क्या हुआ की अनीता ने साड़ी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। जब कृष्ण सिंह ने अपनी गर्लफ्रेंड को फांसी के फंदे पर लटकते देखा तो उसने भी घर के पास एक पेड़ में फंदा लगाकर जान दे दी।
परिजन कह रहे हैं कि दोनों में शादी करने का उतावलापन था और वे इंतजार नहीं कर पाए इसलिए मौत को गले लगा लिया। देर रात सोते समय लड़की ने फांसी लगा ली। लड़के ने उसे फंदे से नीचे उतारा और उसे पानी पिलाने की कोशिश की लेकिन उसकी सांस नहीं चल रही थी, जिससे दुखी होकर लड़का घर से भाग कर गया और खुद भी पेड़ पर फांसी लगा ली।
लड़की के घर वालों का कहना है कि हमने दोनों को 2 साल रुकने के लिए कहा था। लड़का मान गया था लेकिन लड़की मान नहीं रही थी और कह रही थी कि मैं तो दोनों तरफ से बदनाम हो गई। मेरी किसी और से भी शादी भी नहीं हो रही इसलिए उसने फांसी लगा ली।
इस तरह की घटनाएं आमतौर पर शहरो में देखने सुनने को मिलती ग्रामीणों को भोला भाला माना जाता है । उनमें वेलेंटाइन वीक में ऐसा उतावलापन कम ही दिखता है लेकिन अब यह प्रदूषण गांव तक भी पहुंचने लगा है, जिसने असमय ही दो जिंदगियों को निगल लिया।
