जब मासूमों के लिए दीवार बन गई माँ, मधुमक्खियों के हमले में आंगनवाड़ी सहायिका का बलिदान


नीमच।
मध्यप्रदेश के नीमच जिले से मानवता, ममता और साहस को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। आंगनवाड़ी केंद्र में 20–25 मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए एक महिला ने अपनी जान की परवाह किए बिना खुद को मौत के सामने खड़ा कर दिया। इस घटना में आंगनवाड़ी सहायिका कंचन बाई मेघवाल ने बच्चों को बचाते हुए हजारों मधुमक्खियों के डंक सहन किए और अंततः वीरगति को प्राप्त हो गईं।
घटना उस समय हुई जब आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चे मौजूद थे। अचानक मधुमक्खियों के एक झुंड ने केंद्र पर हमला कर दिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर कंचन बाई ने बिना एक पल गंवाए उन्हें बचाने का फैसला किया। उन्होंने बच्चों को अपने पीछे कर लिया और स्वयं मधुमक्खियों के डंक झेलती रहीं। उनके साहस और त्याग के कारण सभी बच्चे सुरक्षित बच गए, लेकिन कंचन बाई गंभीर रूप से घायल हो गईं। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
कंचन बाई मेघवाल का यह बलिदान केवल एक घटना नहीं, बल्कि ममता और कर्तव्य की अमर मिसाल बन गया है। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर 20 परिवारों के चिराग बुझने से बचा लिए।
इस दर्दनाक घटना के बाद कंचन बाई का परिवार गहरे संकट में है। उनके पीछे लकवाग्रस्त पति और तीन मासूम बच्चे रह गए हैं। परिवार के सामने अब जीवन यापन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को लेकर गहरी संवेदना व्यक्त की है और सरकार से मांग की है कि कंचन बाई मेघवाल के परिवार को आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी ली जाए, ताकि उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके।
कंचन बाई अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बच्चों की रक्षा में दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान समाज को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

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