

बिलासपुर।
रेलवे द्वारा किए गए नए सर्वे और नापजोख को लेकर चुचुहियापारा स्थित गणेशनगर वार्ड क्रमांक 46 में विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले किए गए सर्वे में रेलवे लाइन के किनारे बने मकानों का केवल कुछ हिस्सा ही अतिक्रमण की जद में बताया गया था, लेकिन अब नई नाप में पूरे-पूरे मकानों के साथ ही वार्ड की कांक्रीट सड़क तक को रेलवे भूमि बताकर तोड़ा जा रहा है। इसे लेकर रेलवे अफसरों पर मनमानी करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ से दो साल पहले रेलवे ने गणेशनगर क्षेत्र की जमीन का सर्वे कर अतिक्रमण का निशान लगाया था। उस समय कई मकानों का केवल 5 से 8 फीट हिस्सा ही रेलवे सीमा में बताया गया था, जिसे हटाने के लिए लोग भी सहमत थे। लेकिन हालिया सर्वे में पूरे मकानों को ही अतिक्रमण की श्रेणी में शामिल कर लिया गया, जिससे क्षेत्रवासियों में आक्रोश है।
90 परिवारों को किया गया पुनर्वास
चुचुहियापारा के गणेशनगर में सरकारी जमीन पर रह रहे 103 परिवारों का सर्वे किया गया था। इन्हें अटल आवास योजना के तहत मकान देने के लिए फार्म भरवाए गए थे। उस समय 97 परिवारों की सूची तैयार की गई थी। बताया जा रहा है कि जो लोग उस दौरान मौजूद नहीं थे और अपने मकान किराए पर देकर कहीं चले गए थे, उनके नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए।
बाद में नगर निगम में 5 हजार रुपए जमा कर पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद 90 परिवारों के नाम अंतिम सूची में आए। इन परिवारों को हेमूनगर, बंधवापारा और दयालबंद मधुबन में बने आवासों में शिफ्ट कर दिया गया। शेष बचे परिवारों के नाम अब नगर निगम की सूची से भी काट दिए गए हैं, जिससे उनके सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
पुराने सर्वे के अनुसार नाप की मांग
स्थानीय पार्षद इब्राहिम खान ने कहा कि रेलवे ने पहले जो नाप किया था, उसी के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उस सर्वे में केवल मकानों का आंशिक हिस्सा रेलवे भूमि में आ रहा था, जिसे लोग छोड़ने को तैयार थे। नई नाप में पूरे मकानों को तोड़ना अनुचित है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के नाम अटल आवास की सर्वे सूची से कट गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से चर्चा कर समाधान निकालने की बात कही गई है, ताकि जिनके घर टूट रहे हैं, उन्हें रहने के लिए छत मिल सके।
फिलहाल रेलवे की नई नापजोख के चलते गणेशनगर में तनाव का माहौल है और प्रभावित परिवार प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
