“सभी एक अन्य भारतीय भाषा अवश्य सीखे” डॉ संजय अनंत


उत्कल साहित्य संसद की साहित्य संगोष्ठी में मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक समीक्षक डॉ संजय अनंत ने अपने उद्बोधन में भारत में भाषा सौहाद्र व समन्वय पर विस्तार व्याख्यान दिया।
हिन्दी में आत्मीयता है जो सम्पूर्ण भारत को जोड़ती है किन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि अन्य भारतीय भाषाएं कमतर है। भाषा के विषय में हमें पश्चिम का अनुकरण करना चाहिए , जैसे यूरोप में अधिकांश अपनी मातृ भाषा के अतिरिक्त एक या दो अन्य भाषाएं जानते है ।
सरकार भारतीय भाषाओं को लोकप्रिय बनाने स्कूल व कॉलेज स्तर पर सर्टिफिकेट कोर्स आरम्भ करे ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दक्षिण पूर्व रेलवे के पी आर ओ श्री साकेत रंजन जी थे।


विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार श्री बृजेश सिंह थे।
इस कार्यक्रम में त्रिभाषा अंतरिक उत्कल विलास का विमोचन भी किया गया जिसका संपादन व उत्कल साहित्य संसद के संचालक श्री बामन चंद्र दीक्षित जी ने किया है।
। भगवान जगन्नाथ जी को समर्पित दो ओड़िया काव्य संग्रह का भी विमोचन संपन्न हुआ
इस संगोष्ठी में एक हिन्दी ओड़िया संयुक्त काव्य संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया
उस संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ कवि अशोक शर्मा जी ने किया।
ओड़िया समाज के समाज की तीन बच्चियों ने कत्थक व उड़ीसा का लोक नृत्य प्रस्तुत किया ।

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