आवारा कुत्तों को लेकर कथित पशु प्रेमी संगठनो के असली चेहरे हुए बेनकाब, सुप्रीम कोर्ट ने जमकर लगाई लताड़

सुप्रीम कोर्ट में जो आवारा कुत्तों पर सुनवाई चल रही है उसमें तीन एनिमल संगठन है जो चाहते हैं सड़कों पर आवारा कुत्ते ना हटे

और भारत के टॉप टेन वकीलों में से एक कपिल सिब्बल पिंकी आनंद और अरविंद दातार इन आवारा कुत्तों के पक्ष में मुकदमा लड़ रहे हैं

हालांकि  सुप्रीम कोर्ट ने इन सबको बहुत कस के लताड़ा और कहा कि आपको सड़कों पर घूम रहे आवारा बच्चे अनाथ बच्चे नजर नहीं आते आपको आवारा कुत्ते नजर आते हैं आप इंसानों की सेवा नहीं कर रहे हैं। आप कुत्तों की सेवा कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट ने  यह भी कहा कि जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं उनकी भी जवाबदेही तय होगी। अगर कोई कुत्ता काटेगा तो उसे एरिया में कुत्तों को खाना खिलाने वालों से भी सरकार मुआवजा वसूल करें। उसके अलावा भारत के हर एक राज्य सरकार की जिम्मेदारी हो गई है अगर किसी को कुत्ता काटेगा तो राज्य सरकार को मुआवजा देना होगा

अरविंद दातार ने जब सवाल उठाया की इकोसिस्टम में कुत्तों की भी भूमिका है तब जज ने पूछा की कुत्तों को खाने वाले जानवर कौन है और कितने बाघ शेर और लकड़बग्घा ने पिछले 1 साल में कुत्तों का शिकार किया तब वकील की बोलती बंद हो गई

और ऊपर से जज साहब ने टिप्पणी किया की रणथंबोर के एक बाघ की मौत एक आवारा कुत्ते के खाने से हो गई क्योंकि उसे कुत्ते के अंदर ऐसा वायरस था जिसका कोई इलाज नहीं है यानी कि अगर कुत्तों को बाघ खाए तो उस बाघ की भी मौत हो सकती है

सुप्रीम कोर्ट ने  साफ कहा कि हम लोगों को बच्चों को महिलाओं को हर रोज कुत्तों के काटने से मरते तड़पते नहीं देख सकते आवारा कुत्तों की समस्या विकराल बन चुकी है इसमें सभी राज्यों की सरकार जिम्मेदार है जिन्होंने अभी तक कोई काम नहीं किया

अब सबसे महत्वपूर्ण बात की कपिल सिब्बल पिंकी आनंद अरविंद दातार को इतनी मोटी फीस यह पेटा और दूसरे संगठन क्यों दे रहे हैं क्योंकि इन संगठनों को विश्व की तमाम रेबीज की वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने मोटा फंडिंग दिया है

पूरे दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा रेबीज के वैक्सीन की डिमांड है क्योंकि पूरे विश्व में सबसे ज्यादा कुत्ते काटे जाने की घटना भारत में होती है अमेरिका जर्मनी चीन और भारत यह सिर्फ चार देश रेबीज का वैक्सीन बनाते हैं भारत जितना वैक्सीन बनता है उतना बहुत कम है इसीलिए भारत को वैक्सीन इंपोर्ट करना पड़ता है और जिन देशों में वैक्सीन बनते हैं वहां खुद सड़कों पर आवारा कुत्तों पर प्रतिबंध है अमेरिका और यूरोप में आवारा कुत्तों को या तो गोली मार दी जाती है या उन्हें शेल्टर में बंद कर दिया जाता है लेकिन इन देशों की वैक्सीन की कंपनियां चाहती हैं कि भारत में आवारा कुत्ते सड़कों पर घूमते रहे ताकि उनका वैक्सीन का धंधा चलता रहे

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