

बिलासपुर।
शहर के लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन संत विजय कौशल महाराज ने कर्म, भक्ति और जीवन मूल्यों पर गहन विचार रखे। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद न तो स्वर्ग होता है और न ही नरक, बल्कि जीवात्मा अपने किए गए कर्मों के अनुसार नए जीवन में प्रवेश करती है। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद की जाने वाली दसवीं, तेरहवीं जैसी क्रियाएं सामाजिक परंपराएं हैं और आत्मा कर्मानुसार एक वर्ष के भीतर नया शरीर धारण कर लेती है।

संत विजय कौशल ने कहा कि जब भूत, प्रेत और पिशाचों का संपर्क संतों से होता है तो संत कृपा से उन्हें भी सद्गति प्राप्त होती है। रामकथा मानव मन को परिवर्तित कर सही दिशा दिखाती है और मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने कथा को अमृत के समान बताते हुए कहा कि यह मन को शुद्ध करती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

कर्म और भक्ति का बताया महत्व
कथा के दौरान संत कौशल ने मनु-शतरूपा, राजा दशरथ और भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने दांपत्य जीवन को मर्यादा और शालीनता से युक्त रखने की सीख देते हुए कहा कि केवल तीर्थ यात्रा ही नहीं, बल्कि अपने घर को भी तीर्थ बनाना चाहिए, तभी जीवन में सच्ची शांति और सुख की प्राप्ति होती है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर नजर आए और पूरा पंडाल राममय वातावरण से गूंज उठा। इस अवसर पर मुख्य संरक्षक अमर अग्रवाल, शशि अग्रवाल, महेश अग्रवाल, राम अवतार अग्रवाल, सुनील मरदा, हर्षिता पांडे, कमल सोनी, श्याम शुक्ला, सुरेश अग्रवाल, सुरेश गोयल, चंद्रप्रकाश बाजपाई, महर्षि बाजपाई, देवेश खत्री सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

