नगर निगम में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में बड़ा अड़ंगा, 42 प्रतिशत आवेदन अटके


बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम में मकान निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पिछले एक साल में निगम के आठों जोन कार्यालयों और भवन शाखा में कुल 1710 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से केवल 993 आवेदन ही स्वीकृत हो सके। शेष 717 आवेदन यानी करीब 42 प्रतिशत आवेदन या तो प्रक्रिया के बीच अटक गए या अधूरे रह गए। इससे सैकड़ों आवेदक असमंजस की स्थिति में हैं और उन्हें यह तक स्पष्ट नहीं है कि उनके आवेदन में कमी क्या है और कब तक स्वीकृति मिल पाएगी।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, बीते एक साल में 400 से अधिक आवेदन बार-बार री-असाइन किए गए, जबकि लगभग 40 आवेदन ऐसे पाए गए जिन्हें सीधे रिजेक्ट करना पड़ा। अधिकारियों के मुताबिक, अधिकतर रिजेक्ट किए गए आवेदन अवैध प्लॉटिंग या बिना स्वीकृत ले-आउट पर मकान निर्माण से जुड़े थे। नियमों के तहत ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।
नियम यह भी कहता है कि प्रत्येक जोन कार्यालय को लंबित आवेदनों के कारण स्पष्ट रूप से बताने होते हैं और इसके लिए कारण-पत्रक चस्पा करने की व्यवस्था है। हालांकि, हकीकत यह है कि शहर के किसी भी जोन कार्यालय में यह जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जा रही है। इसके चलते आवेदकों को न तो आवेदन की वास्तविक स्थिति पता चल पा रही है और न ही यह समझ में आ रहा है कि सुधार कहां और कैसे करना है।
अधिकारियों की दलीलें
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कई आवेदकों ने पूरे दस्तावेज जमा नहीं किए। कई नक्शों में तकनीकी त्रुटियां पाई गईं, जबकि कुछ आवेदन अवैध प्लॉटिंग से संबंधित थे। इसके अलावा फील्ड स्टाफ द्वारा समय पर निरीक्षण न हो पाना भी एक बड़ी वजह रही।
बिना अनुमति बने 200 मकान
सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर बीते एक साल में करीब 200 मकान नगर निगम की अनुमति के बिना ही बना लिए गए। अब ऐसे मकानों को राजीनामा प्रक्रिया के तहत दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है। यह स्थिति साफ तौर पर दर्शाती है कि नक्शा स्वीकृति की जटिल और धीमी प्रक्रिया अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रही है।
आवेदन अटकने के प्रमुख कारण
नगर निगम के अनुसार नक्शा पास न होने या आवेदन लंबित रहने के पीछे दस्तावेजों की कमी या गलत दस्तावेज, नक्शों में तकनीकी त्रुटियां, अवैध प्लॉटिंग, फील्ड स्टाफ के निरीक्षण में देरी और आवेदकों द्वारा दी गई अधूरी या गलत जानकारी प्रमुख कारण हैं।
इस पूरे मामले पर महापौर पूजा विधानी ने कहा कि दस्तावेजों में कमी या अवैध प्लॉटिंग के मामलों में नक्शे पास नहीं किए जा सकते, लेकिन जोन अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे संबंधित आवेदकों को स्पष्ट रूप से बताएं कि नक्शा पास क्यों नहीं हो रहा है। हर जोन कमिश्नर को इसकी जवाबदेही निभानी होगी।
नगर निगम में नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्धता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका समाधान न होने पर आम नागरिकों की परेशानी और अवैध निर्माण दोनों बढ़ते रहेंगे।

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