

एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जुबान फिसली है। उनकी इस बदजुबानी से प्रदेश का साहू समाज आग बबूला है। दरअसल भूपेश बघेल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना बंदर से की थी। छत्तीसगढ़ साहू समाज ने सभी जिले में एसपी को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है समाज ने कहा कि भूपेश बघेल के पास 10 दिन का समय है। वह माफी मांगे, नहीं तो आंदोलन किया जाएगा।
बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने जंगल की कहानी सुनाते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव को बेंदरा कह दिया था। छत्तीसगढ़ी में बयान देते हुए बघेल ने कहा था कि जंगल के सभी राजा मन मिलकर बेंदरा ला राजा बना दिन।
इस बयान पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता की भाषा और शब्दों में मर्यादा होनी चाहिए। दरअसल 29 दिसंबर को भूपेश बघेल बिलासपुर के लिंगियाडीह पहुंचे थे, जहां उन्होंने बस्ती उजाड़ने को लेकर पिछले 37 दिन से चल रहे स्थानीय आंदोलन का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर तीखा हमला किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यहां जो गार्डन बनाया जा रहा है क्या मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ वहां घूमने आएंगे ? उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा जमा कर बैठे लोगों से यहां तक कह दिया की वे डटे रहे उन्हें कोई नहीं नुकसान पहुंचाएगा।
इस दौरान उन्होंने डिप्टी सीएम अरुण साव पर तीखे हमले किए। छत्तीसगढ़ी में कहानी सुनाते हुए कहा कि एक बार जंगल में मामला उठा की शेर ही हमेशा राजा बनता है । इस बार शेर को बदलना चाहिए। तो देखा की जंगल मे सबसे ज्यादा सक्रिय बंदर है, तो जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर बंदर को राजा बना दिया, एक बार बघवा हिरण के बच्चे को ले गया। हिरण के बच्चे को बचाने के लिए बंदर इस पेड़ से उस पेड़ पर कूदने लगा। पूछने पर बंदर ने कहा कि बच्चा बचे या ना बचे। मेरे प्रयास में कमी नहीं होना चाहिए। यही अरुण साव की स्थिति है, जिस पर खफा होते हुए साहू समाज ने भूपेश बघेल को माफी मांगने के लिए 10 दिन का समय दिया है।
प्रदेश में साहू समाज का बड़ा वोट बैंक है। खासकर बिलासपुर विधानसभा और लोकसभा में । ऐसे में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
