


गुरुवार को पारंपरिक राटा पूजा के साथ श्री सोलापुरी माता पूजा का विधिवत शुभारंभ हुआ। विगत 25 वर्षों से बारह खोली, स्टेशन रोड, बिलासपुर में यह आयोजन किया जा रहा है। आयोजन के रजत जयंती वर्ष के प्रथम दिन वॉयरलैस कॉलोनी से राटा पूजा शोभा यात्रा निकाली गई।
आयोजन समिति के अध्यक्ष वी रामा राव और सचिव एस सांई भास्कर ने बताया कि मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपो को दक्षिण भारत और खड़कपुर में सोलापुरी माता के रूप में पूजा जाता है। पारंपरिक रूप से प्रथम दिन काष्ठ पूजा के लिए शोभायात्रा निकाली जाती है। गुरुवार सुबह वायरलेस कॉलोनी से यह शोभा यात्रा निकली। इससे पहले पुजारी पार्थ सारथी ने यजमान विजय नायर, श्रीमती माधवी नायर और शुभम नायर के साथ पारंपरिक पूजा अर्चना की , जिसके पश्चात सर पर कलश रखकर महिलाएं शोभा यात्रा में शामिल हुई। शोभा यात्रा की अगवाई पारंपरिक डफली वादकों ने किया। इस अवसर पर काली नृत्य के कलाकारों ने आकर्षक एवं प्रभावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति दी। आतिशबाजी के साथ इस शोभा यात्रा ने रेलवे क्षेत्र का भ्रमण किया। महिलाओं के सर पर मौजूद कलश में जल के साथ हल्दी और नीम की पत्ती मिश्रित थी। शोभायात्रा नगर भ्रमणकर पूजा पंडाल पहुंची, जहां पुजारी ने जामुन, आम, रबर पेड़ की टहनी स्थापित कर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की।

मान्यता है कि सोलापुरी माता सात बहने हैं , जिनके एकमात्र भाई पोतराजू घुमंतू प्रवृत्ति के हैं। वे ही माताओ के रक्षक भी है, इसलिए काष्ठ पूजा के साथ पूजा पंडाल के समक्ष पोत राजू की भी स्थापना की गई जो आगामी आयोजन तक सम्पूर्ण दिवस मां की प्रतिमा के सम्मुख मौजूद रहेंगे । पारंपरिक दक्षिण भारतीय श्रृंगार और वस्त्र धारण कर बड़ी संख्या में महिलाएं इस शोभा यात्रा में शामिल हुई। पूजा पंडाल में इन्हीं महिलाओं और बाल पुजारी द्वारा अनुष्ठान संपन्न कराए गए। राटा पूजा को काष्ठ पूजा भी कहा जाता है।
मान्यता है कि इन दिनों पड़ने वाली भीषण गर्मी से मुक्ति और ग्रीष्मकालीन बीमारियों से बचाव के लिए माँ सोलापुरी की आराधना की जाती है। उनके आशीर्वाद से तेज गर्मी के प्रकोप और ग्रीष्मकालीन बीमारियों से मुक्ति मिलती है , तो वही उनकी पूजा अर्चना करने से क्षेत्र में उनकी कृपा से शीतलता आती है।

कल निकलेगी शोभायात्रा
श्री सोलापुरी माता पूजा समिति के रजत जयंती वर्ष में शुक्रवार 25 अप्रैल संध्या 6:00 बजे लोको कॉलोनी स्थित त्रिपुर सुंदरी मरिमाई मंदिर से विशाल शोभायात्रा निकलेगी। इससे पहले पुजारी पार्थ सारथी गीली हल्दी से माता की प्रतिमा का निर्माण करेंगे, जिनका श्रृंगार नींबू, मोगरे की माला आदि से किया जाएगा। गाजेबाजे के साथ यह शोभा यात्रा निकलेगी, जिसमे बाल पुजारी अपने शीश पर मां की प्रतिमा धारण कर शोभायात्रा की अगवाई करेंगे। शोभा यात्रा के स्वागत में रास्ते भर जल का छिड़काव कर सड़क की सफाई की जाएगी। वस्त्र बिछा कर माता और शोभायात्रा का स्वागत किया जाएगा। जगह-जगह रंगोली बनाकर और नीम की टहनियों के तोरण द्वार सजाकर माता के आगमन की खुशी प्रकट की जाएगी। कई स्थानों पर शोभायात्रा के स्वागत में शरबत आदि का वितरण किया जाएगा। पारंपरिक रूप से रास्ते भर श्रद्धालु सड़क पर लेट कर अपने ऊपर से देवी की प्रतिमा को गुजरने देंगे। मान्यता है कि ऐसा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस मार्ग से निकलेगी शोभा यात्रा
शुक्रवार शाम को लोको कॉलोनी से निकलकर शोभायात्रा नयापारा चौक, अन्नपूर्णा कॉलोनी, हेमू नगर ओवर ब्रिज होते हुए हेमू नगर विधानी चौक, कासिमपरा, एन ई कॉलोनी, कंट्रोल ब्लॉक, बंगला यार्ड, कंस्ट्रक्शन कॉलोनी, ए टाइप, वॉयरलैस कॉलोनी होते हुए देर रात को पूजा पंडाल पहुंचेगी, जहां देवी की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना की जाएगी।

आयोजन समिति के अध्यक्ष वी रामा राव और सचिव एस सांई भास्कर ने बताया कि इस वर्ष भी खड़कपुर से पुजारी पार्थ सारथी अपने 6 सहयोगियो के साथ पहुंचे हैं जिनके द्वारा इस वर्ष माता के उन स्वरूपों की स्थापना की जाएगी जिनके दर्शन अब तक स्थानीय भक्तों ने नहीं किए हैं, तो वहीं इस वर्ष भोग निर्माण के लिए जगदीश और उनके साथी पहुंचे हैं जिनके द्वारा प्रतिदिन माता को अर्पित करने के लिए पारंपरिक अलग-अलग प्रकार के भोग का निर्माण किया जाएगा।
आगामी शुक्रवार को कुमकुम पूजा का आयोजन होगा तो वही 4 मई रविवार को माता को महा कुंभम का भोग अर्पित किया जाएगा। प्रतिदिन संध्या पूजा- आरती के साथ पंडाल पहुंचने वाली महिलाओं और बच्चों को निशुल्क कूपन प्रदान किया जाएगा, जिनकी लॉटरी निकालकर उन्हें आकर्षक उपहार प्रदान किए जाएंगे, तो वहीं प्रति दिन पंडाल में भोग प्रसाद का वितरण भी होगा।
की गई है खास सजावट
रजत जयंती वर्ष में विशाल पंडाल का निर्माण किया गया है, जिसकी खास सजावट के लिए खड़कपुर से फूल और डेकोरेशन के लिए विशेष प्रकार की लाइट मंगाई गई है। पूरे क्षेत्र को बिजली से जगमग कर दिया गया है। आपको बता दे कि बिलासपुर में श्री सोलापुरी माता पूजा का आरंभ भी इसी स्थान से हुआ था। इस आयोजन में सम्मिलित होने आसपास के अलावा खड़कपुर, आंध्र प्रदेश, दुर्ग भिलाई , रायपुर आदि से भी भक्त पंडाल पहुंचते हैं। इस आयोजन की प्रतीक्षा श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर रहती है।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष वी रामा राव, सचिव एस सांई भास्कर के अलावा सी नवीन कुमार, बी शंकरराव, एल श्रीनिवास, ई अप्पा राव , टी गिरिधर , डी वासु, बी श्रीनिवास , मोंटी करण, सी श्रीनिवास , जी काशी राव, आर रविशंकर, मुरली सूरी, रवि तेजा, प्रभाकर, एस श्रीनिवास, तुषार, डी श्रीनिवास वासु, टी दिवाकर, चंटी, ए रवि, बी सांई, पी चंद्र बाबू, जी काशीराव, हरीश, डॉक्टर एम एस राजू , ई लक्ष्मण राव, जी लोकेश राव, के शंकरराव, यश आदि उपस्थित रहे।
