
रायपुर। छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार इस वर्ष भी लंबा होता दिखाई दे रहा है। 16 जून बीत जाने के बावजूद प्रदेश में मानसून ने दस्तक नहीं दी है, जबकि किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट चुके हैं। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के आगे बढ़ने की स्थिति अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं बनी है और इसके लिए विदर्भ तथा तेलंगाना क्षेत्र में अच्छी वर्षा का इंतजार किया जा रहा है।
पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून का तय समय पर पहुंचना अपवाद बन गया है। वर्ष 2011 से 2025 के बीच 11 बार मानसून निर्धारित तिथि के बाद पहुंचा, जबकि केवल चार वर्षों में यह समय पर या निर्धारित तिथि से पहले प्रदेश में पहुंच सका।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो के प्रभाव और मेडागास्कर के पास बने मौसमीय तंत्र के कमजोर होने के कारण मानसून की प्रगति प्रभावित हुई है। हालांकि बस्तर क्षेत्र में हाल ही में 23 मिमी वर्षा दर्ज की गई है और बादल छाए रहने का सिलसिला जारी है, जिससे जल्द मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद बनी हुई है।
मौसम विभाग का कहना है कि बस्तर के साथ-साथ विदर्भ और तेलंगाना के हिस्सों में पर्याप्त वर्षा होने पर छत्तीसगढ़ में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून को प्रदेश में पहुंचने में अभी 4 से 5 दिन और लग सकते हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 में मानसून निर्धारित तिथि 8 जून को ही पहुंचा था। वहीं 2020, 2021 और 2024 में यह तय समय से पहले प्रदेश में प्रवेश कर चुका था। इसके विपरीत 2018, 2019 और 2023 जैसे वर्षों में मानसून को पहुंचने में काफी देरी हुई।
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 23 जून के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ सकता है। वहीं मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो मानसून 20 जून के आसपास बस्तर क्षेत्र में पहुंच सकता है।
मानसून में हो रही देरी से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि प्रदेश में खरीफ सीजन की बुवाई काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहती है। किसान अब जल्द अच्छी वर्षा और मानसून के आगमन की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
