
बिलासपुर। जिला उपभोक्ता विवाद आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वाहन विक्रेता को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए मृतक वाहन स्वामी की पत्नी को 15 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि बिना बीमा प्रभावी हुए नई मोटरसाइकिल की डिलीवरी देना नियमों के विपरीत है और यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने की।
जानकारी के अनुसार लोरमी निवासी मुकेश यादव ने 28 अक्टूबर 2019 को बिलासपुर स्थित गैलेक्सी मोटर्स से नई बाइक खरीदी थी। वाहन खरीदते समय उन्होंने बीमा प्रीमियम की राशि भी चेक के माध्यम से शोरूम में जमा कर दी थी। बाइक की डिलीवरी मिलने के अगले ही दिन 29 अक्टूबर 2019 को मुकेश यादव अपनी बहन के घर से लौट रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल मुकेश की इलाज के दौरान मौत हो गई।
दुर्घटना के बाद मृतक की पत्नी राजेश्वरी यादव ने बीमा कंपनी से 15 लाख रुपए के व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर का दावा किया। जांच में सामने आया कि दुर्घटना के दिन वाहन की बीमा पॉलिसी प्रभावी ही नहीं थी। शोरूम ने बाइक की डिलीवरी 28 अक्टूबर को दे दी थी, लेकिन बीमा प्रीमियम राशि बीमा कंपनी को देरी से भेजी गई, जिसके कारण पॉलिसी 4 नवंबर 2019 को जारी हुई।
उपभोक्ता आयोग ने मामले में कहा कि नियमानुसार वाहन का बीमा होने के बाद ही उसकी डिलीवरी दी जानी चाहिए थी। आयोग ने माना कि बीमा प्रीमियम प्राप्त करने के बावजूद बिना वैध बीमा के वाहन ग्राहक को सौंपना विक्रेता की ओर से सेवा में गंभीर कमी है।
विक्रेता गैलेक्सी मोटर्स ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि दीपावली त्यौहार के कारण बीमा प्रक्रिया में देरी हुई थी और ग्राहक को बिना बीमा वाहन नहीं चलाने की सलाह दी गई थी, लेकिन आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने अपने आदेश में गैलेक्सी मोटर्स को मृतक की पत्नी को 15 लाख रुपए का बीमा लाभ देने के साथ फरवरी 2023 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए अलग से भुगतान करने का आदेश भी दिया गया है।
चूंकि दुर्घटना के समय बीमा पॉलिसी प्रभावी नहीं थी, इसलिए आयोग ने बीमा कंपनी को मामले में दायित्व से मुक्त कर दिया।
