

बिलासपुर, छत्तीसगढ़। इस वर्ष अप्रैल माह ने शहरवासियों को अभूतपूर्व गर्मी का सामना करने पर मजबूर कर दिया। लगातार 15 दिनों तक चले हीट वेव ने पिछले एक दशक (2017–2026) के सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। यद्यपि वर्ष 2016 में 17 दिनों तक हीट वेव दर्ज किया गया था, परंतु इस दशक में यह सबसे लंबा और लगातार चलने वाला गर्मी का दौर साबित हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार, 17 अप्रैल से शुरू हुआ यह सिलसिला बिना किसी ठहराव के 15 दिनों तक जारी रहा। इस दौरान न केवल दिन का तापमान ऊंचा बना रहा, बल्कि रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिली। 27 अप्रैल को न्यूनतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 10 वर्षों में अप्रैल की सबसे गर्म रात मानी जा रही है। इससे स्पष्ट है कि शहर में चौबीसों घंटे गर्मी का दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति के कारण तापमान में गिरावट का सामान्य चक्र बाधित हो गया। पूर्व वर्षों में हर 3-4 दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में कमी आती थी, लेकिन इस बार ऐसा कोई ब्रेक नहीं मिला। परिणामस्वरूप, 17 अप्रैल को 42.8 डिग्री से शुरू हुआ तापमान 25 से 28 अप्रैल के बीच चरम पर पहुंच गया, जब अधिकतम तापमान 42.2 से 44.4 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। 29 अप्रैल को भी तापमान 42.6 डिग्री रहा, जो हीट वेव की श्रेणी में आता है।
हालांकि अधिकतम तापमान का पुराना रिकॉर्ड इस बार नहीं टूटा। वर्ष 2017 में दर्ज 45 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा अब भी बरकरार है, लेकिन इस वर्ष की विशेषता लगातार और लंबी अवधि तक बनी रहने वाली गर्मी रही, जिसने आम जनजीवन को अधिक प्रभावित किया है। मौसम विभाग ने फिलहाल राहत के संकेत कमजोर बताए हैं।

वन्यजीवों पर भी दिखा असर
भीषण गर्मी का असर शहर के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जू में तापमान शहर से 3-4 डिग्री कम होने के बावजूद जानवरों के व्यवहार में बदलाव आया है। सुबह 11 बजे के बाद अधिकांश केज खाली नजर आते हैं, जहां बाघ और तेंदुए ठंडे स्थानों में चले जाते हैं, जबकि भालू और सियार पेड़ों की छांव में शरण लेते हैं।
जू प्रबंधन ने स्थिति को देखते हुए इस वर्ष समर डाइट 15 दिन पहले ही लागू कर दी है। पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन के अनुसार, मांसाहारी जानवरों के आहार में करीब 2 किलोग्राम तक कमी की गई है, जबकि शाकाहारी पशुओं को दिन में तीन बार हरा चारा दिया जा रहा है। साथ ही तरबूज और खीरा जैसे ठंडक प्रदान करने वाले फलों की मात्रा भी बढ़ाई गई है।
लगातार बढ़ती गर्मी और राहत के अभाव ने प्रशासन और आम नागरिकों दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में भी तापमान में विशेष गिरावट की संभावना कम है, जिससे सतर्क रहने की आवश्यकता है।
