

बिलासपुर, 25 अप्रैल 2026। नगर पालिक निगम बिलासपुर ने मेयर-इन-काउंसिल के प्रस्ताव क्रमांक 26 के तहत अधिवक्ताओं का नया पैनल नियुक्त किया है। 10 अप्रैल 2026 को सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव के अनुसार, जिला न्यायालय में निगम की ओर से पैरवी करने के लिए 16 अधिवक्ताओं की अस्थायी नियुक्ति की गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
नवगठित पैनल में शामिल अधिवक्ताओं में समीर कुमार शुक्ला का नाम विशेष रूप से चर्चा में है। शहर में सक्रिय सामाजिक-वैचारिक व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाने वाले शुक्ला लंबे समय से राष्ट्रवाद और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर वे जनसरोकार के विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि न्यायालयीन मामलों में उनकी सक्रियता और अनुभव नगर निगम के पक्ष को मजबूत करने में सहायक साबित होगा।
वैचारिक सक्रियता और संगठनात्मक जुड़ाव
समीर शुक्ला का नाम उन अधिवक्ताओं में लिया जाता है जो सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। वे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे हैं। शहर में कई ज्वलंत मुद्दों पर उनकी सार्वजनिक उपस्थिति और स्पष्ट वक्तव्य उन्हें अलग पहचान दिलाते हैं।
समर्थकों में उत्साह
पैनल में शामिल किए जाने की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों और परिचितों ने उन्हें बधाई दी है। इसे उनकी सामाजिक सक्रियता और पेशेवर योगदान की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
पैनल और पारिश्रमिक व्यवस्था
नगर निगम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रत्येक प्रकरण के लिए 5,000 रुपये (सभी व्यय सहित) का भुगतान निर्धारित किया गया है। जिन मामलों में जवाबदावा प्रस्तुत किया जा चुका है, उनमें 2,500 रुपये प्रति प्रकरण और जिनका निराकरण हो चुका है, उनमें 5,000 रुपये प्रति प्रकरण भुगतान किया जाएगा।
अन्य नियुक्त अधिवक्ता
पैनल में समीर कुमार शुक्ला के अलावा अरुण कुमार सिंह, संजय कुमार क्षत्रिय, आदर्श कुमार गुप्ता, निखिल तिवारी, सरोज साहू, प्रतिज्ञा सिंह, रतीन्द्र बाजपेयी, अनंत बाजपेयी, अजीत कुमार भारत, सुभेन्द्र कुमार कश्यप, निशात खान, ज्योतिन्द्र उपाध्याय, मनु कुमार मिश्रा, विनोद कुमार शर्मा और अमित बाजपेयी को भी शामिल किया गया है।
नगर निगम द्वारा गठित यह नया अधिवक्ता पैनल न्यायालयीन मामलों में संस्थागत पैरवी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं, समीर कुमार शुक्ला की नियुक्ति ने इस निर्णय को शहर में अतिरिक्त चर्चा का विषय बना दिया है।
