

बिलासपुर,
ढाई वर्ष से लंबित लोफंदी रेत घाट परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई में अप्रत्याशित रूप से भारी समर्थन सामने आया है। गुरुवार को हुई जनसुनवाई में प्राप्त 74 आवेदनों में से 69 ने घाट संचालन के पक्ष में सहमति जताई, जबकि मात्र 5 आवेदनों में विरोध दर्ज किया गया। इस परिणाम के बाद अब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस रेत घाट को पर्यावरण स्वीकृति मिलने की संभावना प्रबल हो गई है।
ढाई घंटे में पूरी हुई जनसुनवाई
कछार क्षेत्र में सुबह 11 बजे शुरू हुई जनसुनवाई दोपहर करीब 1:30 बजे संपन्न हुई। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, पर्यावरण मंडल के प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति सामने नहीं आई।
ग्रामीणों ने रखीं शर्तें
हालांकि अधिकांश ग्रामीणों ने घाट संचालन का समर्थन किया, लेकिन कुछ शर्तें भी सामने रखीं। ग्रामीणों ने मांग की कि रेत की लोडिंग पोकलेन मशीनों के बजाय स्थानीय मजदूरों से कराई जाए तथा परिवहन के लिए भारी वाहनों के स्थान पर ट्रैक्टर का उपयोग किया जाए। अधिकारियों ने इन मांगों को उच्च स्तर पर विचारार्थ भेजने का आश्वासन दिया है।
पहले हुआ था तीखा विरोध
गौरतलब है कि 9 अक्टूबर 2025 को समीपवर्ती गांव में आयोजित जनसुनवाई में इस परियोजना का तीव्र विरोध हुआ था। उस दौरान तीन गांवों के लोगों ने एकजुट होकर 9 लिखित और 42 मौखिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। विरोध के पीछे सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों और हिंसक घटनाओं का हवाला दिया गया था।
इसके विपरीत, इस बार वही क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत रहा। बताया जा रहा है कि जनसुनवाई से पहले विरोध करने वाले पक्षों से संवाद कर लिया गया था, जिससे विवाद की स्थिति नहीं बनी।
पूर्व में विवादों में रहा है घाट
लोफंदी रेत घाट पहले भी कई बार विवादों में रहा है। वर्ष 2020 में रेत से भरे ट्रक से एक व्यक्ति की मौत के बाद अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के आश्वासन दिए गए थे। हालांकि, आरोप रहे हैं कि इसके बावजूद अवैध खनन गतिविधियां जारी रहीं।
प्रशासन तैयार करेगा रिपोर्ट
अपर कलेक्टर शिव कुमार बनर्जी ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त पक्ष और विपक्ष के आवेदनों का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर राज्य शासन को भेजा जाएगा। साथ ही पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है।
पंचायत ने भी जताया समर्थन
ग्राम पंचायत लोफंदी के सरपंच अयोध्या देवांगन ने बताया कि अवैध उत्खनन के कारण क्षेत्र में लगातार विवाद होते थे और पंचायत को राजस्व नहीं मिल रहा था। उन्होंने कहा कि अधिकृत रूप से घाट शुरू होने पर पंचायत को रॉयल्टी प्राप्त होगी, जिससे विकास कार्यों में सहायता मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि इस रेत घाट का ठेका सितंबर 2023 में दिया जा चुका था, लेकिन जनसुनवाई लंबित रहने के कारण संचालन शुरू नहीं हो सका था। अब सकारात्मक जनमत के बाद परियोजना के आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
