छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 के समर्थन में मंगलवार को सर्व हिंदू समाज निकालेगा आभार रैली

छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है। पिछले चुनाव में भी भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया और प्रदेश की जनता ने उन्हें व्यापक समर्थन दिया। यहां सबसे अधिक प्रभाव ईसाई मिशनरियों का है जो आदिवासी इलाकों के अलावा अब अन्य ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी साजिश को अंजाम दे रहे हैं। जो आदिवासी कभी बस्तर की पहचान हुआ करते थे अब वे ईसाई मत्तांतरित होते देखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में पिछड़ा वर्ग भी इनके बहकावे में आ रहा है और अजीब सी दलीलें दे रहा है । इनमें से अधिकांश लोग किसी न किसी प्रलोभन से प्रभावित है । कम पढ़े-लिखे और आईक्यू लेवल कम होने की वजह से इन्हें आसानी से बरगलाया जा रहा है।

बीमार पड़ने पर चंगाई सभा के नाम पर , कभी राशन और पैसे देकर तो कभी और कोई प्रलोभन देकर उनका मतांतरण कराया जा रहा है ।

इधर मजे की बात यह है कि पूरी तरह ईसाई धर्म का पालन करने वाले, नाम से तो हिंदू बने हुए हैं। बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं जो हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बन चुके हैं लेकिन वे अब भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैरकानूनी बता दिया है।

पूरी तरह ईसाई बन चुके हैं यह लोग बड़ी समस्या है क्योंकि इनकी वजह से प्रदेश की डेमोग्राफी बदल रही है , जिसका व्यापक असर राजनीतिक जगत में भी पड़ना तय है और प्रदेश और देश की सत्ता इसी वजह से परिवर्तित होगी। साथ ही आदिवासी संस्कृति से लेकर सनातन संस्कृति पर भी खतरा मंडरा रहा है ,जिसे देखते हुए पिछले दिनों छत्तीसगढ़ सरकार ने धर्म स्वातंत्र्य बिल पेश किया जिसका बड़े वर्ग ने समर्थन किया। लेकिन जैसे ही यह बिल सामने आया अवैध धर्मांतरण में लिप्त समूह बिल बिलाकर बाहर आ गया और अचानक से इसका विरोध करने लगा। उनके पास इस बात का जवाब नहीं है कि उनका विरोध किस बात पर है क्योंकि इस बिल में सभी अवैध धर्मांतरण पर रोक है। हिंदू को जबरन ईसाई या मुसलमान नहीं बनाया जा सकता तो यह भी सच है कि किसी ईसाई और मुसलमान को नियम विरुद्ध हिंदू भी नहीं बनाया जा सकता। हिंदु तो इसका विरोध नहीं कर रहा। यहां तक की मुसलमान भी प्रत्यक्ष तौर पर इसका विरोध नहीं कर रहा है लेकिन बड़ी संख्या में ईसाई संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

पिछले दिनों प्रदेश भर में इसे लेकर आंदोलन किया गया। बिलासपुर के भी अंबेडकर चौक पर प्रदर्शन और धरना हुआ। इस दौरान प्रदर्शनकारी हिंदू पत्रकार पवन गोयल से भी उलझ गए।

इस दौरान ऐसे कुछ चेहरे भी नजर आए जो सनातन और हिंदू कार्यक्रमों में मंच संचालन करते नजर आते हैं तो वहीं ऐसे भी कई लोग थे जो जाहिर तौर पर तो खुद को हिंदू कहते हैं लेकिन वे अवैध धर्मांतरण के पक्षधर नजर आ रहे।

बिलासपुर में सर्व हिंदू समाज लंबे वक्त से धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग करता रहा है। जब उन्होंने देखा कि कुछ मुट्ठी भर लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं तो उन्होंने जवाब में इसके समर्थन का निर्णय लिया है। सर्व हिंदू समाज का कहना है कि मुट्ठी भर लोग प्रदेश में धर्मांतरण के समर्थक हैं जिन्हें मुंहतोड़ जवाब देने और सरकार को समर्थन देने की आवश्यकता है। साथ ही धर्मांतरण रोकने के लिए बने इस कानून के लिए सरकार का आभार भी जताना है। इसी उद्देश्य के साथ सर्व हिंदू समाज द्वारा धर्मांतरण विरोधी कानून के समर्थन में मंगलवार को आभार रैली आयोजित की जा रही है।

मंगलवार शाम 5:00 बजे गांधी चौक से बड़ी संख्या में इस बिल के समर्थक आभार रैली में शामिल होंगे। यह रैली गांधी चौक से निकलकर शहर के मुख्य मार्ग होते हुए देवकीनंदन चौक पहुंचेगी। भगवा ब्रिगेड के ठाकुर राम सिंह ने कहा कि अपने निजी स्वार्थ में हिंदुओं का धर्म बदलवाने वाले ईसाई मिशनरी सड़कों पर इसका विरोध कर रहे हैं । ऐसे धर्मांतरण गिरोह के विरोध में सनातनियों और बिल के समर्थकों को सामने आना होगा और इस रैली में शामिल होकर सरकार को बताना होगा कि प्रदेश की बहु संख्यक जनता उनके साथ है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश में मुसलमानों की संख्या मात्र 2.02% है। ईसाई 1.92% है जबकि हिंदुओं की संख्या अब भी 93.25% है जो इस बिल के समर्थन में है। 2% से भी कम लोग इसका विरोध कर रहे हैं जिनका समर्थन अपने निजी स्वार्थ की वजह से कुछ हिंदू नामधारी लोग भी कर रहे हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ही मंगलवार को आभार रैली का आयोजन किया जा रहा है जिसमें अधिक से अधिक संख्या में सनातनियों के सम्मिलित होने का आवाहन किया गया है।

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