

रेल रोकने पर होगी कानूनी कार्यवाही
रेलवे प्रशासन को यह जानकारी प्राप्त हुई है कि कुछ रेलवे स्टेशनों पर “ रेल रोको” आंदोलन आयोजित करने का आह्वान किया गया है। इस संबंध में आम जनता, विशेषकर युवाओं को सूचित किया जाता है कि रेल संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना, पटरियों पर बैठना, ट्रेन रोकना, रेलवे परिसरों में अनधिकृत प्रवेश करना अथवा रेलवे कर्मचारियों के कार्य में अवरोध उत्पन्न करना कानूनन दंडनीय अपराध है।
रेल सेवाएँ देश की जीवनरेखा हैं। प्रतिदिन लाखों यात्री—विद्यार्थी, मरीज, वरिष्ठ नागरिक, प्रतियोगी परीक्षार्थी एवं कर्मचारी—इन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। किसी भी प्रकार का अवरोध न केवल यात्रियों को भारी असुविधा में डालता है, बल्कि चिकित्सा, परीक्षा, रोजगार एवं पारिवारिक आवश्यकताओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित होते हैं। इससे जनहित एवं राष्ट्रीय संपत्ति को भी क्षति पहुँच सकती है।
प्रासंगिक विधिक प्रावधान
रेलवे अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में इस पर विधिक प्रावधान है-
👉धारा 174(क) — जानबूझकर ट्रेन के संचालन में बाधा डालना / रेल रोको / पिकेटिंग / ट्रैक पर बैठना आदि शामिल है।
दंड का प्रावधान – दोषसिद्धि होने पर अधिकतम 2 वर्ष तक कारावास सहित दंड का प्रावधान।
👉 धारा 147 — रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश / अतिक्रमण आदि पर ।
दंड का प्रावधान – अधिकतम 6 माह का कारावास एवं/या जुर्माना।
👉 धारा 146 – रेलवे सेवक के कार्य में बाधा डालना ।
दंड का प्रावधान – अधिकतम 6 माह का कारावास एवं/या जुर्माना।
👉 धारा 150 — रेल गाड़ी को विद्वेषतः ध्वस्त करना या ध्वस्त करने का प्रयत्न किये जाने पर ।
दंड का प्रावधान – आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक के सश्रम कारावास की सजा ।
👉 धारा 151 — रेल सम्पत्ति को नुकसान या विनाश किये जाने पर ।
दंड का प्रावधान – 05 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना ।
👉 धारा 152 – शत्रुता की भावना से रेल यात्रियों को चोट पहुँचाने या पहुँचाने का प्रयास किये जाने पर ।
दंड का प्रावधान – 10 वर्ष तक की सश्रम कारावास ।
👉 धारा 153 – ट्रेन का परिचालन बाधित करने पर ।
दंड का प्रावधान – 05 वर्ष तक की कारावास ।
युवाओं से विशेष अपील
युवा देश का भविष्य हैं। किसी भी आपराधिक प्रकरण में नाम दर्ज होना या दोषसिद्धि होना उनके शैक्षणिक, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी एवं निजी रोजगार, पासपोर्ट, वीज़ा तथा अन्य करियर अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। एक क्षणिक आवेश या भीड़ के दबाव में लिया गया निर्णय जीवनभर की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
रेलवे प्रशासन युवाओं से विशेष रूप से आग्रह करता है कि वे किसी भी प्रकार के अवैधानिक आंदोलन से स्वयं को दूर रखें, ताकि उनका उज्ज्वल भविष्य सुरक्षित रहे।
लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण संवाद का आग्रह
भारतीय रेल सभी नागरिकों से अपील करती है कि वे अपनी मांगों एवं विचारों को लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण माध्यमों से प्रस्तुत करें। रेल सेवाएँ आवश्यक सार्वजनिक सेवा हैं और इनके अवरोध से आम नागरिकों की सुरक्षा एवं सुविधा प्रभावित होती है।
कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने हेतु रेलवे प्रशासन तथा स्थानीय पुलिस द्वारा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सभी जागरूक जनों से आग्रह है कि रेल संचालन की निरंतरता को बनाए रखें तथा ऐसा कोई भी कार्य न करें जिसमें आपको अनावश्यक परेशानियां झेलनी पड़े ।
