बेंगलुरु में चोरी के आरोपी की पिटाई पर उलटा केस दर्ज, कांग्रेस शासित कर्नाटक में तुष्टिकरण के आरोप

अपने वह कहावत तो सुनी होगी- उल्टा चोर कोतवाल को डांटे । इसी के साथ एक कहावत और जोड़ लीजिए, चोर मचाए शोर। वैसे चोरी और सीना जोरी वाली कहावत भी इस मामले में सटीक बैठती है । ऐसा हम क्यों कह रहे हैं यह इस समाचार को पढ़कर आप समझ जाएंगे। राजनीतिक तुष्टिकरण का ऐसा मामला शायद ही पहले कभी देखा और सुना होगा , जहां पुलिस, चोर नहीं, पीड़ित पक्ष को ही गुनहगार बनाकर उन्हें कटघरे में खड़ा कर रही है। और ऐसा उस राज्य में हुआ जहां कांग्रेस की सरकार है, जिनकी पहचान ही तुष्टीकरण के लिए है। दरअसल
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से राजनीतिक तुष्टिकरण को लेकर एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां चोरी के आरोप में पकड़े गए एक व्यक्ति की स्थानीय लोगों द्वारा पिटाई के बाद उल्टा पीड़ित पक्ष पर ही पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अजगर खान नामक व्यक्ति अपने तीन साथियों के साथ ऑटो रिक्शा से एक रिहायशी इलाके में चोरी के इरादे से एक घर में घुसा था। इसी दौरान घर के लोग जाग गए और शोर मचाने पर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि लोगों ने चोरी करते पकड़े गए अजगर खान की जमकर पिटाई कर दी।
घटना के बाद गंभीर रूप से घायल अजगर खान किसी तरह अपने घर पहुंचा। बताया जा रहा है कि इसके बाद उससे मिलने के लिए कई लोग पहुंचे, जिनमें स्थानीय मौलाना भी शामिल थे। आरोप है कि उन्हें यह सलाह दी गई कि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और वह अपने साथ हुई मारपीट को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है।
इसके बाद अजगर खान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि चोरी के दौरान लोगों ने उसके साथ मारपीट की है। इस शिकायत पर संपीगहल्ली थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस कार्रवाई के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जहां एक ओर व्यक्ति चोरी करते रंगे हाथ पकड़ा गया, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने पहले चोरी के आरोप की बजाय मारपीट की शिकायत पर कार्रवाई क्यों की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिनके घर चोरी करने की कोशिश हुई, उन्हीं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
मामले को लेकर कांग्रेस शासित कर्नाटक में राजनीतिक तुष्टिकरण के आरोप तेज हो गए हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि यही घटना किसी अन्य राज्य में हुई होती तो सबसे पहले चोरी के आरोपी को गिरफ्तार किया जाता, लेकिन यहां कथित तौर पर राजनीतिक दबाव और वोट बैंक की राजनीति के चलते कार्रवाई की दिशा बदल दी गई।
हालांकि पुलिस की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चोरी के प्रयास को लेकर अजगर खान और उसके साथियों पर क्या कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच जारी बताई जा रही है।

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