APK लिंक से साइबर ठगी, अस्पताल कर्मचारी से ₹5 लाख से अधिक की रकम उड़ाई, फर्जी ई-चालान मैसेज बन रहा ठगों का नया हथियार, पुलिस ने जारी की चेतावनी


बिलासपुर।
साइबर ठगों द्वारा APK लिंक के माध्यम से ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। आनंद नगर, उसलापुर में रहने वाले एक अस्पताल कर्मचारी के साथ ठगों ने फर्जी ई-चालान मैसेज भेजकर ₹5,00,199 की रकम कुछ ही मिनटों में उनके खाते से निकाल ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि 03 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 10 बजे उनके मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से एक संदेश प्राप्त हुआ। मैसेज भेजने वाले नंबर के डीपी में परिवहन विभाग का लोगो लगा हुआ था और संदेश में एक APK लिंक भेजा गया था। लिंक के साथ पीड़ित की मोटरसाइकिल का नंबर लिखकर यह दावा किया गया कि वाहन का ई-चालान कटा है।
वाहन नंबर सही होने के कारण पीड़ित को लगा कि वास्तव में चालान आया है। जैसे ही उन्होंने लिंक पर क्लिक किया, उनके मोबाइल में एक संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल हो गई। इसके बाद मात्र 5 मिनट के भीतर UPI के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजैक्शन कर ₹5,00,199 की राशि खाते से निकाल ली गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने साइबर अपराध का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिवहन विभाग या कोई भी सरकारी संस्था व्हाट्सएप पर APK लिंक भेजकर चालान की सूचना नहीं देती।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, APK फाइल या संदिग्ध मैसेज पर क्लिक न करें। जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।


साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी जागरूकता टिप्स


कभी भी अनजान WhatsApp लिंक या APK फाइल डाउनलोड न करें
सरकारी विभाग APK लिंक नहीं भेजते, ई-चालान केवल आधिकारिक वेबसाइट या SMS के जरिए आता है
परिवहन विभाग की असली वेबसाइट या ऐप (Parivahan / mParivahan) से ही चालान की जानकारी जांचें
अपने UPI पिन, OTP, बैंक डिटेल किसी को भी न बताएं
मोबाइल में Unknown Sources से App Install की अनुमति बंद रखें
फोन में अप-टू-डेट एंटीवायरस और सिक्योरिटी अपडेट रखें
ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे यह जानकारी परिवार, दोस्तों और बुजुर्गों तक जरूर पहुंचाएं, ताकि कोई भी व्यक्ति साइबर ठगों का शिकार न बन सके।

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