

रायपुर।
होटल कारोबारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद चर्चा में आईं दंतेवाड़ा में पदस्थ उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) कल्पना वर्मा को राज्य गृह विभाग ने निलंबित कर दिया है। निलंबन के साथ ही उन्हें पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू), नवा रायपुर में अटैच किया गया है। यह कार्रवाई प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें वित्तीय लेन-देन, पद के दुरुपयोग और अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने जैसे बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
जानकारी के अनुसार, होटल कारोबारी दीपक उर्फ अंबेडकर टंडन द्वारा सोशल मीडिया पर डीएसपी कल्पना वर्मा से जुड़ी कथित तस्वीरें, व्हाट्सएप चैट और आरोप वायरल किए गए थे। इसके बाद कारोबारी और उसकी पत्नी ने आईजी रायपुर रेंज, एसएसपी रायपुर और पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कारोबार में लगाए गए पैसों को लेकर विवाद और अवैध लेन-देन के आरोप लगाए गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएचक्यू और आईजी रायपुर रेंज स्तर पर जांच कराई गई। प्राथमिक जांच प्रतिवेदन में यह पाया गया कि वित्तीय लेन-देन, जांच के दौरान दिए गए कथनों और व्हाट्सएप चैट के तथ्यों में विरोधाभास है। साथ ही कर्तव्य के दौरान अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त करने, पद का दुरुपयोग करने और अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के तथ्य प्रतिवेदित हुए।
गृह विभाग के अवर सचिव पूरन लाल साहू के हस्ताक्षर से 5 फरवरी 2026 को जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि डीएसपी कल्पना वर्मा का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत है। इसके चलते उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
इधर, आरोप लगाने वाले होटल कारोबारी की पृष्ठभूमि को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कारोबारी के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के नाम पर वसूली सहित अन्य मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं। लेन-देन के विवाद में उसके साथ मारपीट और कपड़े फाड़ने के वीडियो भी कुछ महीने पहले सामने आ चुके हैं। कांग्रेस शासनकाल के दौरान उसके प्रभावशाली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क होने की भी चर्चा रही है।
फिलहाल डीएसपी कल्पना वर्मा के निलंबन के बाद मामले की आगे की विभागीय और कानूनी जांच की प्रक्रिया जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
