

मेरठ।
कहते हैं जरूरत आविष्कार की जननी होती है, लेकिन मेरठ की एक महिला ने जरूरत के साथ-साथ जुगाड़ को भी नया मुकाम दे दिया। अपने घर के सामने तीन साल से गंदे नाले की सफाई न होने से परेशान महिला ने ऐसा दांव चला कि पुलिस, नगर निगम और जेसीबी मशीनें सब एक साथ मौके पर पहुंच गईं।
महिला ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी कि नाले में “बड़े सेठ का बच्चा” गिर गया है। खुद को उसने बच्चे की नैनी (आया) बताया और कहा कि अगर ठीक से तलाश की जाए तो बच्चा मिल सकता है। सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीमें अलर्ट हो गईं और बिना देर किए मौके पर पहुंच गईं।

10 घंटे चला रेस्क्यू, नाला हुआ चमाचम
बच्चे की तलाश में प्रशासन ने आनन-फानन में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। जेसीबी मशीनें मंगाई गईं, पूरा नाला खुदवाया गया और सालों की जमी गंदगी साफ कर दी गई। करीब 10 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद भी जब नाले से कोई बच्चा नहीं निकला, तब अफसरों की भौंहें तन गईं।
सफाई के बाद खुला राज
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जिस नाले में बच्चा गिरने की बात कही जा रही थी, उसके ठीक सामने उसी महिला का घर है। यही महिला पिछले तीन साल से लगातार नाला साफ कराने की शिकायत कर रही थी, लेकिन हर बार मामला फाइलों में ही दब जाता था।
अधिकारियों के मुताबिक जब सामान्य तरीकों से बात नहीं बनी, तो महिला ने “इमरजेंसी वाला तरीका” अपना लिया। यानी बच्चा नहीं मिला, लेकिन नाला जरूर मिल गया—वो भी पूरी तरह साफ।
अब कार्रवाई की तैयारी
हालांकि महिला की तरकीब ने काम तो कर दिया, लेकिन प्रशासन इस “क्रिएटिव शिकायत” से खासा नाराज है। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और झूठी सूचना देने के आरोप में महिला के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
शहर में चर्चा का विषय
फिलहाल मेरठ में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग हंसते हुए कह रहे हैं—
“जहां फाइलें नहीं चलतीं, वहां जेसीबी चलवाने का ये सबसे पक्का तरीका है।”
