
महेश दुबे

सवाल तस्वीर का नहीं, तकरीर और तकलीफ़ का है!
हुकूमत मज़बूत है,ये दावा बहुत है,
पर रोटी,हवा और सच—तीनों ही कमजोर हैं,आज सत्ता मज़बूत है,लेकिन आम आदमी सबसे कमज़ोर—और यही इस दौर की सबसे कड़वी सच्चाई है!
सब टेंशन में थे आबादी बढ़ रही है, जनसंख्या नियंत्रण कैसे होगी ??
तभी धर्मेंद्र प्रधान जी ले आये UGC और तय कर दिया -40 % वाले बनेंगे डॉक्टर ..
अब कोई हॉस्पिटल से जिंदा वापस नहीं आएगा खुद ब खुद जनसंख्या नियंत्रण हो जाएगी,बहुत मुश्किल नहीं है “जिंदगी”
की “सच्चाई” को समझना साहब..जिस “तराजू” पर “दूसरों” को तौलते हैं उस पर कभी खुद बैठ कर देखिए!!
चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।”
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम-2026’ पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए छात्र-छात्राओं के बीच समानता को प्रोत्साहित करने के लिए बनाए गए इस कानून से समाज में असमानता फैल रही है इस कानून के बहुत से नियम अव्यवहारिक है,दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन नियम बनाते समय सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है, नया नियम सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का माध्यम बन सकता है,उन्होंने स्पष्ट किया कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए,उनके उत्थान हेतु पूर्ण रूप से मुफ्त शिक्षा मुफ्त हास्टल मुफ्त किताबें स्कालरशिप दो सामान्य वर्ग का विद्यार्थी जो आर्थिक रूप से निर्धन है वह भी इस बात को मानकर चलता है कि कंपटीशन में उसे उच्च अंक लाना होगा अपने उज्जवल भविष्य के लिए और उसके लिए वह वैसी मेहनत भी करता है वर्तमान कानून कंपटीशन के इस दौर में रौढा उत्पन्न कर सकता है मानसिक उत्पीड़न के चलते वह तो इसमें बस दो सुधार चाहते हैं!
1- जो झूठा अथवा साजिशन शिकायत करे और दोष साबित होने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो।
2- सभी वर्ग को इसमें शामिल किया जाए ताकि किसी भी वर्ग के बच्चे के साथ जातिगत भेदभाव न हो सकें!
आरक्षण आरक्षण नहीं राजा का मुकुट हो गया है जो बाप के बाद बेटा और फिर पोता पहनेगा!
दशकों पहले कानून में किए गए प्रावधान की मंशा आर्थिक एवं समाजिक रूप से पिछड़े तबके के लोगो को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की सार्थक पहल की गई तमाम कानूनी दांव-पेंच से अलग हटकर सबसे बड़ा मुद्दा यहां है की तीन- चार पीढियों से इसका लाभ ले रहे लोगों को जो सक्षम हो चुके हैं उन्हें इसका लाभ क्या निरंतर मिलना चाहिए??
आरक्षण का लाभ उन्हें मिलें जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरियों मे नही है जो सम्पन्न नहीं है अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में एक विशेष आरक्षित वर्ग तेजी से लाभ लेकर मजबूत एव सम्पन्न हो रहा है जो अपने वर्ग में ही अगड़ा बन बैठा है जो सुविधाओं का बड़ा हिस्सा अपने पास ही रख रहा है जिसका परिणाम ज़रूरतमंदों को इस का लाभ नही मिला रहा है ,उच्च अधिकारियों कर्मचारीयों के बच्चों को मिला रहा लाभ दिखाई दे रहा है पर सुदूर जंगलों अंदरूनी गांवो मे बसे लोगों के बच्चों को नही जो संघर्षरत है अपने भविष्य को लेकर
अनिश्चित है आज भी सरकार को प्रतिस्पर्धा की इस दौड़ मे आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की पहल करनी चाहिए शिक्षा सबके लिए जरूरी है और वह उसका अधिकार है,वोटो की गंदी राजनीति का परिणाम समान्य वर्ग के बच्चो को शैक्षणिक जीवन में डर -भय का वातावरण पैदा कर उन्हें इससे वंचित करने का षड्यंत्र है यह कानून!
“स्वाभिमान होना अत्यंत आवश्यक है,
अन्यथा लोग तुम्हें वहाँ भी दबाने का प्रयास करेंगे, जहां तुम्हारा अधिकार है”!!
[महेश दूबे टाटा महाराज
बिलासपुर छत्तीसगढ ]
