लीकेज और अवैध कनेक्शन बने 24×7 जलापूर्ति में सबसे बड़ी बाधा, 550 किमी लंबी पाइपलाइन के बावजूद 70 वार्डों में अभी संभव नहीं चौबीसों घंटे पानी


बिलासपुर।
अमृत मिशन योजना के तहत बिलासपुर शहर में पेयजल आपूर्ति की जा रही है, लेकिन नगर निगम फिलहाल शहर के 70 वार्डों में 24 घंटे पानी देने की स्थिति में नहीं है। इसकी प्रमुख वजह पाइपलाइन में लगातार हो रहा लीकेज, टूटे पाइप और बड़ी संख्या में अवैध नल कनेक्शन हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में यदि सीधे 24×7 जलापूर्ति शुरू की गई तो करीब 20 प्रतिशत पानी बेकार बह सकता है, जबकि वर्तमान सीमित समय की सप्लाई में ही 5 से 10 प्रतिशत पानी का नुकसान हो रहा है।
नगर निगम के अनुसार, अमृत मिशन और जल आवर्धन योजना के तहत शहर में करीब 550 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। इतने बड़े नेटवर्क में कई जगह पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है। कहीं सीपेज है तो कहीं पाइप टूटे हुए हैं। कई इलाकों में लीकेज रोकने के लिए पाइपों पर कपड़ा और पॉलिथीन तक बांधना पड़ रहा है, जो व्यवस्था की गंभीर खामियों को दर्शाता है।


चरणबद्ध तरीके से होगा 24×7 पानी सप्लाई का ट्रायल
इन समस्याओं को देखते हुए नगर निगम ने 24 घंटे जलापूर्ति के लिए नया तरीका अपनाने का निर्णय लिया है। पूरे शहर में एक साथ पानी देने के बजाय अब एक-एक पानी की टंकी से 24×7 सप्लाई का ट्रायल किया जाएगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि किन इलाकों में ज्यादा लीकेज है, कहां तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं और अवैध कनेक्शन कहां ज्यादा हैं। कमियों को दूर करने के बाद ही पूरे शहर में 24 घंटे पानी सप्लाई लागू की जाएगी।
निगम अधिकारियों का अनुमान है कि शहर में 20 हजार से अधिक अवैध नल कनेक्शन हैं, जो लीकेज और पानी की बर्बादी की बड़ी वजह बने हुए हैं। जब तक इन अवैध कनेक्शनों को बंद नहीं किया जाता, तब तक 24×7 सप्लाई व्यावहारिक नहीं है।
पानी की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती
वर्तमान में नगर निगम को रोजाना 72 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की सप्लाई मिल रही है। बिरकोना स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी 72 एमएलडी ही है, जो पूरी तरह खूंटाघाट जलाशय पर निर्भर है। बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पानी की उपलब्धता बढ़ाना निगम के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
बिजली खर्च में नहीं आई अपेक्षित कमी
अमृत मिशन की शुरुआत के दौरान 24×7 जलापूर्ति का दावा किया गया था और पुराने शहर में लगे 681 ट्यूबवेल बंद करने की बात कही गई थी। ट्यूबवेल संचालन के दौरान हर महीने 8 से 10 लाख रुपये तक का बिजली बिल आता था। हालांकि ट्यूबवेल की संख्या में कमी आई है, लेकिन पंप संचालन, पाइपलाइन मेंटेनेंस, मोटर-पंप रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन पर होने वाला खर्च अब भी लगभग उतना ही बना हुआ है।
आउटर क्षेत्र में 28 करोड़ की जल योजना पर काम शुरू, इस गर्मी राहत नहीं
बिलासपुर के आउटर क्षेत्रों के वार्डों में 28 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित पेयजल योजना पर अब जाकर काम शुरू हो पाया है। योजना के तहत नई पाइपलाइन और पानी की टंकियों का निर्माण किया जाना है। यह योजना करीब एक साल पहले स्वीकृत हो चुकी थी, लेकिन प्रशासनिक देरी के चलते काम शुरू नहीं हो सका। अब गर्मी के मौसम में निर्माण शुरू होने से इस वर्ष लोगों को राहत मिलने की संभावना नहीं है। बहतराई क्षेत्र में टंकी निर्माण का काम तेज किया गया है, जबकि अन्य वार्डों में पाइपलाइन बिछाने की तैयारी चल रही है। योजना पूरी होने पर हजारों परिवारों को लाभ मिलने का दावा किया गया है।
अधिकारी बोले
“पूरे शहर में एक साथ 24 घंटे पानी देना फिलहाल संभव नहीं है। अवैध कनेक्शन बहुत ज्यादा हैं। पहले इन्हें बंद किया जाएगा। इसके बाद एक-एक टंकी से 24×7 सप्लाई का ट्रायल किया जाएगा, ताकि लीकेज और अन्य तकनीकी समस्याओं की पहचान कर सुधार किया जा सके।”
— अनुपम तिवारी, प्रभारी, जल शाखा

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