पूज्य माता धर्मी देवी जसूजा का निधन, चकरभाठा में नम आंखों से अंतिम संस्कार

शशि मिश्रा


चकरभाठा/बिलासपुर।
ब्रह्मलीन पूज्य बाबा गुरमुख दास साहेब जी की धर्म पत्नी एवं संत सांई लाल दास साहेब जी तथा शोभराज जसूजा–धर्मू जसूजा की पूज्य माता श्रीमती धर्मी देवी जसूजा का सोमवार रात रायपुर में अचानक तबीयत बिगड़ने से अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे सिंधी समाज सहित श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई।
पूज्य माताजी का पार्थिव शरीर सोमवार रात करीब 11 बजे रायपुर से चकरभाठा लाया गया, जहां उसे झूलेलाल मंदिर में दर्शनार्थ रखा गया। मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में भक्तजन मंदिर पहुंचे और श्रद्धा सुमन अर्पित कर अंतिम दर्शन किए। दोपहर 2 बजे विधि-विधान के साथ उनकी अंतिम संस्कार यात्रा संत सांई लाल दास साहेब जी के निवास स्थान से प्रारंभ हुई।


अंतिम यात्रा बाबा गुरमुख दास कुटिया पहुंची, जहां पूज्य माताजी को बाबा जी के चरणों में माथा टेकाकर आरती की गई। इसके बाद यात्रा झूलेलाल मंदिर पहुंची, जहां अरदास के उपरांत नगर भ्रमण करते हुए गुरुद्वारा साहब ले जाया गया। वहां भी श्रद्धापूर्वक माथा टेकने और अरदास के बाद अंतिम यात्रा मुक्तिधाम चकरभाठा पहुंची, जहां पंडित पुराण शर्मा जी द्वारा विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
अंतिम यात्रा में चकरभाठा सहित आसपास के क्षेत्रों और प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में समाजजन, श्रद्धालु और संत-महात्मा शामिल हुए। नगरवासियों और समाजसेवियों ने मार्ग में फूलों की वर्षा कर पूज्य माताजी को अंतिम विदाई दी। इस दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम रहीं और हर कोई माताजी की सादगी, विनम्रता और स्नेहिल मुस्कान को याद करता नजर आया।
इस अवसर पर शिवधारा आश्रम अमरावती के संत सांई संतोष कुमार जी, शदाणी दरबार रायपुर से सांई उदय लाल जी विशेष रूप से चकरभाठा पहुंचे और अंतिम संस्कार यात्रा में प्रारंभ से अंत तक साथ रहे। उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मां का स्थान कोई नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि पूज्य माताजी ने न केवल दीन-दुखियों की सेवा की, बल्कि अपने पुत्र संत सांई लाल दास साहेब जी को भी सेवा, भक्ति और भगवान झूलेलाल का संदेश घर-घर पहुंचाने की प्रेरणा दी।
संतों ने कहा कि आज देश-विदेश में भगवान झूलेलाल का नाम गूंज रहा है, यह सब माताजी के आशीर्वाद और कृपा का ही परिणाम है। कुछ लोग अपने कर्मों और सेवा कार्यों से अमर हो जाते हैं, पूज्य माताजी उन्हीं में से एक थीं।


पूज्य सिंधी पंचायत चकरभाठा, दुर्ग, रायगढ़, मुंगेली, बिलासपुर, बिल्हा, रायपुर, तिल्दा, भाटापारा, गोंदिया, राजनांदगांव, शहडोल, पेंड्रा, नागपुर सहित अनेक शहरों की पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित कर जसूजा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
समस्त श्रद्धालुओं ने भगवान झूलेलाल से प्रार्थना की कि वे पूज्य माता धर्मी देवी जसूजा की पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।

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