

बिलासपुर। कांग्रेस ने संगठन सृजन के दूसरे चरण में बुधवार को ब्लॉक अध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी। इस सूची के जरिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संगठनात्मक समीकरणों को नया रूप दिया गया है। शहर के चार ब्लॉकों में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में तीन पुराने अध्यक्षों को दोबारा मौका दिया गया है।
शहर में सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने चार ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। ब्लॉक-1 में संतोष गर्ग, ब्लॉक-2 में पूर्व पार्षद तजम्मुल हक, ब्लॉक-3 में हितेश देवांगन और रेलवे क्षेत्र ब्लॉक-4 में साकेत मिश्रा को अध्यक्ष बनाया गया है। इनमें ब्राह्मण वर्ग से दो, मुस्लिम वर्ग से एक और ओबीसी वर्ग से एक नेता को जिम्मेदारी दी गई है। सरकंडा क्षेत्र में पहले साहू समाज से अध्यक्ष रहे थे, इस बार देवांगन समाज के नेता को मौका देकर कांग्रेस ने सामाजिक परंपरा को बनाए रखा है।

सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक-1 के अध्यक्ष संतोष गर्ग को पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी का समर्थन प्राप्त है। ब्लॉक-2 में तजम्मुल हक के नाम पर विजय पांडेय और केशरवानी दोनों की सहमति रही। वहीं ब्लॉक-3 के अध्यक्ष हितेश देवांगन कांग्रेस नेता अनिल टाह के करीबी माने जाते हैं और उनके नाम पर भी सहमति बनी। साकेत मिश्रा को रेलवे क्षेत्र ब्लॉक की जिम्मेदारी दी गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने चेहरों पर भरोसा
ग्रामीण इलाकों के 11 ब्लॉकों में से तीन अध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें बिल्हा से गीतांजलि कौशिक, सीपत से राजेंद्र धीवर और तिफरा नगर से लक्ष्मीनाथ साहू शामिल हैं। गीतांजलि कौशिक पूर्व विधायक सियाराम कौशिक की बहू हैं, जबकि राजेंद्र धीवर जिला पंचायत सदस्य हैं। लक्ष्मीनाथ साहू को जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद का संभावित दावेदार भी माना जा रहा है। इन तीनों को केशरवानी का करीबी बताया जा रहा है।

इसके अलावा मस्तूरी से भोला राम साहू, कोटा से अरुण त्रिवेदी, तखतपुर से अभ्युदय तिवारी, बेलगहना से अश्वनी कुमार, रतनपुर से प्रभंजन बैसवाड़े, रतनपुर नगर से सुभाष अग्रवाल, तखतपुर नगर से शैलेंद्र निर्मलकर और सकरी से अमित साहू को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है।
विधायक संतुष्ट, कुछ नेताओं में नाराजगी
सूची जारी होने के बाद कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया संतुष्ट नजर आ रहे हैं। कोटा, बेलगहना और रतनपुर में अटल श्रीवास्तव के समर्थकों को मौका मिला है, वहीं सीपत और मस्तूरी में दिलीप लहरिया की सहमति से नाम तय किए गए। हालांकि, सकरी से अध्यक्ष बनाए गए अमित साहू को लेकर चर्चा है कि उन्हें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी ठीक से नहीं जानते। वहीं, कुछ नेताओं के समर्थकों को जिम्मेदारी न मिलने से संगठन के भीतर नाराजगी की भी चर्चा है।
सहमति वाले नाम सूची से बाहर
संगठन सृजन के दौरान पर्यवेक्षकों ने ब्लॉक स्तर पर नेताओं से चर्चा कर नामों का पैनल तैयार किया था। शहर के चार ब्लॉकों में से तीन में सर्वसम्मति से नाम लगभग तय माने जा रहे थे, लेकिन अंतिम सूची में वे नाम शामिल नहीं हो सके। सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और एआईसीसी महासचिव भूपेश बघेल के समर्थकों को इस सूची में भी जगह नहीं मिली। इससे पहले शहर और जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी उनके समर्थकों को मौका नहीं मिल पाया था, और अब ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति में भी यही रुझान दिखाई दे रहा है।
