
बिलासपुर। कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क में लगभग एक दशक के लंबे इंतजार के बाद हिमालयन गोरल के प्रजनन में सफलता मिली है। पार्क में एक मादा हिमालयन गोरल ने स्वस्थ मादा मेमने को जन्म दिया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों को बड़ी सफलता मिली है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में दिल्ली जू से एक नर और दो मादा हिमालयन गोरल कानन पेंडारी लाए गए थे। लंबे समय तक प्रजनन नहीं होने पर प्रबंधन ने एक और जोड़ा मंगाया, लेकिन इसके बाद भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में जू के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन ने गोरल के व्यवहार और प्राकृतिक जीवनशैली का गहन अध्ययन किया।

अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली यह प्रजाति प्राकृतिक रूप से नमक की तलाश करती है और इसका संबंध उनकी प्रजनन क्षमता से भी हो सकता है। इसके बाद गोरल के आहार में अतिरिक्त नमक शामिल किया गया। चिकित्सकों के इस प्रयोग का सकारात्मक परिणाम सामने आया और एक मादा गोरल गर्भवती हो गई।
मई माह में मादा गोरल ने एक स्वस्थ मादा मेमने को जन्म दिया। वर्तमान में मेमना पूरी तरह स्वस्थ है और अपनी मां के साथ बाड़े में उछल-कूद करते हुए देखा जा सकता है। इस जन्म के साथ ही कानन पेंडारी में हिमालयन गोरल की संख्या बढ़कर छह हो गई है।
वन्यजीव विशेषज्ञ इस सफलता को दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।
रोजी पैलिकन का प्रजनन अब भी चुनौती
वहीं कानन पेंडारी में पिछले 25 वर्षों से मौजूद रोजी पैलिकन अब भी प्रबंधन के लिए पहेली बने हुए हैं। एक नर और दो मादा पक्षियों की मौजूदगी के बावजूद इनके प्रजनन में अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनके लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण तैयार नहीं हो पाने के कारण सभी प्रयास विफल रहे हैं। प्रबंधन इस दिशा में भी लगातार प्रयास कर रहा है।
