पति का दावा- 8 साल से होटल में रह रहा हूं; बच्चों ने कहा- पिता अक्सर घर आते हैं और परिवार के साथ खाना खाते हैं
बिलासपुर। पत्नी पर मानसिक प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और वैवाहिक संबंध बनाने से इनकार करने का आरोप लगाकर तलाक मांगने वाले पति को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। पति का दावा था कि पत्नी के व्यवहार से परेशान होकर वह 2018 से होटल में रह रहा है। वहीं, बेटे और बेटी ने अदालत में बताया कि उनके पिता अक्सर घर आते हैं और परिवार के साथ खाना भी खाते हैं। उनके आने-जाने पर कोई रोक नहीं है। इन बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने पति की तलाक की अपील खारिज कर दी।
जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता और परित्याग के आरोप साबित नहीं कर सका। अदालत ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी।
मामले के अनुसार, जगदलपुर निवासी दंपती की शादी 7 जुलाई 1992 को हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं। पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पत्नी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है, अपमानित करती है और वैवाहिक संबंध बनाने से इनकार करती है। उसने यह भी दावा किया था कि पत्नी उसे झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देती थी। पति के अनुसार, पत्नी के व्यवहार से परेशान होकर उसे घर छोड़कर होटल में रहना पड़ा।
वहीं, पत्नी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पति अपनी इच्छा से घर छोड़कर होटल में रहने लगे थे। उसने न तो पति को प्रताड़ित करने और न ही वैवाहिक संबंधों से इनकार करने की बात स्वीकार की। पत्नी ने अदालत में यह भी कहा कि वह अब भी पति के साथ रहना चाहती है।
बच्चों के बयानों से पति के दावे को नहीं मिला समर्थन
सुनवाई के दौरान बेटे और बेटी के बयान महत्वपूर्ण रहे। बेटी ने बताया कि पिता अक्सर घर आते हैं और परिवार के साथ खाना खाते हैं। बेटे ने भी पिता के घर आने की बात कही। दोनों के बयानों से इस दावे की पुष्टि नहीं हुई कि माता-पिता के विवाद के कारण पिता को घर छोड़कर अलग रहना पड़ा।
हाई कोर्ट ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ कि पत्नी ने पति को घर छोड़ने के लिए मजबूर किया था। पति यह भी साबित नहीं कर सका कि पत्नी ने जानबूझकर वैवाहिक संबंध समाप्त करने का प्रयास किया।
केवल अलग रहने से परित्याग साबित नहीं होता
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के लिए मानसिक क्रूरता और परित्याग जैसे आधारों को ठोस साक्ष्यों से साबित करना जरूरी है। केवल लंबे समय तक अलग रहने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दूसरे पक्ष ने वैवाहिक रिश्ता छोड़ दिया है। परित्याग साबित करने के लिए अलग रहने के साथ वैवाहिक जीवन समाप्त करने की मंशा भी स्थापित करनी होती है। इन आधारों पर पति की अपील खारिज कर दी गई।