बिलासपुर : लगातार सनातन पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले उदय निधि स्टालिन के खिलाफ फिर दर्ज करने की मांग


दिनांक: 23 मई, 2026
स्थान: बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ बिलासपुर में FIR दर्ज करने हेतु पुलिस अधीक्षक को सौंपा गया आवेदन
विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयंसेवको ने बिलासपुर एसपी से की तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का आग्रह।
कार्यकर्ताओं ने कहा— “धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
बिलासपुर: तमिलनाडु के विधायक और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म और हिंदू धर्म के खिलाफ लगातार दी जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में आज बिलासपुर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। प्रार्थीगण और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर एक औपचारिक आवेदन सौंपा, जिसमें उदयनिधि स्टालिन के विरुद्ध तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने और सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
सौंपे गए आवेदन में कार्यकर्ताओं ने उल्लेख किया है कि वर्ष 2023 में एक सार्वजनिक मंच से उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म की तुलना ‘डेंगू, मलेरिया और कोरोना’ जैसी बीमारियों से करते हुए इसे समाप्त करने की बात कही गई थी। इसके बाद, हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा के भीतर भी उनके द्वारा इसी तरह की अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां दोहराई गई हैं।


करोड़ों हिंदुओं की आस्था को पहुंची ठेस: सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह विवादित बयान सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर तेजी से प्रसारित हुआ है, जिससे न केवल देशभर के हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य, घृणा और तनाव फैलने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी भी धर्म की आस्था का इस तरह सरेआम अपमान नहीं किया जा सकता।
कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग: पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए शिकायती पत्र में नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
धारा 196 BNS: धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य और शत्रुता फैलाना।
धारा 299 BNS: जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
धारा 353(2) BNS: समाज में अशांति और नफरत फैलाने वाले वक्तव्य देना।
इसके साथ ही पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A, 295A और 505(2) के समतुल्य प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है।
कार्यकर्ताओं ने जिला पुलिस प्रशासन से मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अविलंब FIR दर्ज कर न्यायोचित कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया है।

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