
शशि मिश्रा
तखतपुर। सरकारी सहायता राशि में कथित जालसाजी के मामले ने उस समय दुखद मोड़ ले लिया, जब पुलिस कार्रवाई के डर से 20 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली। ग्राम चना डोंगरी निवासी कमलेश श्रीवास ने थाने से लौटने के बाद अपने घर में फांसी लगा ली। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार उर्वशी श्रीवास ने अपने पति पुरुषोत्तम श्रीवास की कथित सर्पदंश से मौत के आधार पर 4 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त की थी। बाद में जांच में पाया गया कि जिस मर्ग रिपोर्ट (क्रमांक 23/2022) के आधार पर राशि स्वीकृत हुई, वह किसी अन्य व्यक्ति शोभाराम कौशिक की थी, जिसकी मौत फांसी से हुई थी।
कलेक्टर बिलासपुर के निर्देश पर हुई जांच में दस्तावेजों में अनियमितता सामने आई। तत्कालीन तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने कथित आदेश पत्र पर अपने हस्ताक्षर को फर्जी बताया।
एफआईआर के बाद बयान के लिए बुलाया गया
धोखाधड़ी (धारा 420) के तहत मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने कमलेश श्रीवास और उसकी मां को बयान के लिए थाने बुलाया था। बताया जा रहा है कि थाने से लौटने के बाद कमलेश मानसिक तनाव में था। आशंका जताई जा रही है कि सामाजिक बदनामी और कानूनी कार्रवाई के भय से उसने घर पहुंचकर ताला तोड़ा और फांसी लगा ली।
पड़ोसियों ने दी सूचना
घटना की जानकारी पड़ोसियों को होने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। आरक्षक सत्यार्थ शर्मा ने युवक को फंदे से नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
दो बड़े मामलों के बाद चर्चा
तखतपुर क्षेत्र में हाल के समय में यह दूसरी घटना है, जिसने लोगों को झकझोर दिया है। इससे पहले भारतमाला परियोजना से जुड़े एक मामले में एफआईआर के बाद एक पूर्व पटवारी ने भी आत्महत्या कर ली थी। अब सर्पदंश सहायता राशि प्रकरण में युवक की मौत के बाद प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई के तरीके पर चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
