

बिलासपुर। शहर के कोनी क्षेत्र में एक बुजुर्ग दंपती को हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद अब तक अपनी ही संपत्ति का कब्जा नहीं मिल पाया है। दंपती का आरोप है कि भतीजे और उसकी बेटी ने गिफ्ट डीड के जरिए संपत्ति अपने नाम करवाने के बाद उन्हें घर से बेदखल कर दिया। न्याय के लिए एसडीओ, कलेक्टर से लेकर हाई कोर्ट तक लड़ाई जीतने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिल सकी है।
कोनी स्थित कंचन विहार निवासी 83 वर्षीय सुरेश मणि तिवारी और उनकी 80 वर्षीय पत्नी लता तिवारी ने वर्ष 2016 में अपने भतीजे रामकृष्ण पांडे के नाम 1250 वर्गफीट जमीन और उस पर बने मकान की गिफ्ट डीड की थी। दंपती का कोई पुत्र नहीं है, इसलिए उन्होंने इस उम्मीद में संपत्ति हस्तांतरित की थी कि भतीजा जीवनभर उनकी सेवा और देखभाल करेगा।
दंपती का आरोप है कि संपत्ति मिलते ही भतीजे और उसकी बेटी का व्यवहार बदल गया। उन्हें जबरन मकान की पहली मंजिल पर रहने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वृद्धावस्था में सीढ़ियां चढ़ना उनके लिए बेहद कठिन था। इतना ही नहीं, खाने-पीने और अन्य बुनियादी जरूरतों में भी कटौती की गई। बिजली और पानी का कनेक्शन तक काट दिया गया। परिस्थितियां इतनी बिगड़ गईं कि दंपती को वृद्धाश्रम में शरण लेनी पड़ी।
मामला एसडीओ और कलेक्टर के समक्ष पहुंचा, जहां निर्णय दंपती के पक्ष में आया। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन वहां से भी आदेश बुजुर्ग दंपती के पक्ष में ही आया। इसके बावजूद उन्हें अब तक मकान का वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया है।
इस संबंध में तहसीलदार प्रकाश चंद्र साहू ने बताया कि कोर्ट के आदेश वाले दिन ही बेदखली आदेश जारी कर दिया गया था। 2 फरवरी को टीम मौके पर पहुंची तो मकान पर ताला लगा मिला। 4 फरवरी को दोबारा टीम भेजी गई, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल नहीं मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कोनी थाना प्रभारी से चर्चा कर शीघ्र बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
इधर, दंपती की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। हाल ही में लता तिवारी गिर गईं, जिससे उनके पैर की हड्डी टूट गई है। इसके बावजूद दंपती ने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी है और प्रशासन से जल्द कब्जा दिलाने की मांग की है।
