

बिलासपुर। शहर में टमाटर के बढ़ते दामों के पीछे केवल महंगाई नहीं, बल्कि लंबी दूरी की ढुलाई, रास्ते में होने वाली खराबी और खुदरा व्यापारियों के खर्च भी प्रमुख कारण हैं। बेंगलुरु की मंडियों में 20 से 22 रुपए प्रति किलो बिकने वाला टमाटर बिलासपुर के उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते 55 से 60 रुपए प्रति किलो में बिक रहा है।
तिफरा सब्जी मंडी में इन दिनों स्थानीय टमाटर की आवक पूरी तरह बंद हो चुकी है। मंडी के व्यापारी अब पूरी तरह कर्नाटक के बेंगलुरु से आने वाले टमाटर पर निर्भर हैं। तिफरा मंडी में प्रतिदिन करीब 200 टन टमाटर पहुंच रहा है, जहां से जीपीएम, मुंगेली, कोरबा और जांजगीर-चांपा समेत आसपास के जिलों में इसकी आपूर्ति की जाती है।

व्यापारियों के अनुसार बेंगलुरु से बिलासपुर की दूरी 1400 किलोमीटर से अधिक है। लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में एक ट्रक का किराया 90 हजार से 1.10 लाख रुपए तक पहुंच गया है, जिससे प्रति 25 किलो के क्रेट पर लगभग 150 से 160 रुपए का अतिरिक्त खर्च आता है।
लंबे सफर और गर्म मौसम का असर टमाटर की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि एक क्रेट में औसतन 4 से 5 किलो टमाटर रास्ते में खराब हो जाता है। करीब 20 प्रतिशत तक होने वाले इस नुकसान की भरपाई बिक्री मूल्य में जोड़नी पड़ती है, जिससे थोक कीमतें बढ़ जाती हैं।
मंडी में 25 किलो के एक क्रेट की कीमत वर्तमान में 750 से 800 रुपए है, यानी थोक दर लगभग 30 से 32 रुपए प्रति किलो पड़ रही है। इसके बाद बाजार तक माल पहुंचाने का किराया, खराबी का जोखिम, दुकान संचालन का खर्च, बिजली बिल और व्यापारिक लाभ जोड़ने पर खुदरा कीमत लगभग दोगुनी होकर 55 से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है।
तिफरा सब्जी मंडी व्यापारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में टमाटर की नई फसल अक्टूबर-नवंबर में बाजार में आती है। फिलहाल स्थानीय उत्पादन पूरी तरह बंद है और आपूर्ति बाहरी राज्यों पर निर्भर है। ऐसे में अक्टूबर से पहले टमाटर की कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना नहीं दिख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय उत्पादन शुरू होने तक उपभोक्ताओं को महंगे टमाटर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। फिलहाल बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ती दूरी का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है।
