
बिलासपुर। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय टांडे का तबादला कर उन्हें बिलासपुर से हटा दिया गया है। उनकी जगह रामेश्वर जायसवाल को जिले का नया डीईओ नियुक्त किया गया है। लंबे समय से शिक्षा विभाग में विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके जायसवाल अब जिले की शिक्षा व्यवस्था की कमान संभालेंगे।
टांडे का कार्यकाल लगातार विवादों, शिकायतों और विभागीय फैसलों को लेकर उठे सवालों के कारण चर्चा में रहा। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, युक्तियुक्तकरण, शिक्षकों के अटैचमेंट, अनुकंपा नियुक्तियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को लेकर उनके खिलाफ कई स्तरों पर शिकायतें की गई थीं। ये मामले जिला प्रशासन, संभागीय अधिकारियों से लेकर राज्य शासन तक पहुंचे थे। कुछ मामलों में जांच की प्रक्रिया भी जारी बताई जा रही है।
इस बीच बोर्ड परीक्षाओं में जिले के कमजोर प्रदर्शन को भी विभागीय स्तर पर गंभीरता से लिया गया। सुशासन तिहार के दौरान आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई थी।
निलंबन आदेश से बढ़ा विवाद
तबादले से पहले डीईओ टांडे द्वारा बिल्हा ब्लॉक के मटियारी शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ सहायक शिक्षिका सुपर्णा टेंगवार को निलंबित किए जाने से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि स्कूल की प्रभारी प्रधान पाठिका के खिलाफ शिकायत करने के कारण उन्हें साजिशन निशाना बनाया गया।
सुपर्णा टेंगवार का कहना है कि विभाग ने उनका पक्ष सुने बिना और स्पष्टीकरण का अवसर दिए बिना निलंबन आदेश जारी कर दिया। उन्होंने बताया कि जनवरी में स्कूल के तत्कालीन प्रधान पाठक के कथित रूप से नशे की हालत में स्कूल आने का वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई हुई थी। उस समय वह एफएलएन प्रशिक्षण में शामिल थीं, बावजूद इसके उन पर छात्रों से वीडियो और फोटो बनवाने का आरोप लगाया गया।
शिक्षिका ने वेतन वृद्धि रोके जाने के आदेश को चुनौती देते हुए कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उनका आरोप है कि शिकायत की जांच करने के बजाय उन्हें ही निलंबित कर दिया गया।
वहीं विजय टांडे ने इस मामले में कहा कि शिक्षिका की शिकायत जांच योग्य नहीं थी और गांव के लोगों द्वारा सुशासन तिहार में की गई शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है।
नए डीईओ के सामने कई चुनौतियां
नवनियुक्त डीईओ रामेश्वर जायसवाल के सामने जिले में शिक्षकों की कमी दूर करने, युक्तियुक्तकरण से जुड़े लंबित विवादों का समाधान, अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों का निपटारा, स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और नए शैक्षणिक सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। शिक्षा विभाग में उनके अनुभव को देखते हुए अब जिले की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
