सफाई ठेका समाप्त, 48 करोड़ के एक्सटेंशन प्रस्ताव पर उठे सवाल, एमआईसी की सीमा 3 करोड़, शासन को भेजा गया प्रस्ताव


बिलासपुर। शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रही कंपनी दिल्ली लायंस सर्विसेस का अनुबंध दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद न तो नया एग्रीमेंट किया गया और न ही औपचारिक रूप से एक्सटेंशन आदेश जारी हुआ, फिर भी कंपनी पिछले करीब दो महीनों से 70 वार्डों में सफाई कार्य कर रही है। ऐसे में भुगतान की वैधानिकता और वित्तीय नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
3 करोड़ की सीमा, भेजा 48 करोड़ का प्रस्ताव
नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) को वित्तीय नियमों के तहत अधिकतम 3 करोड़ रुपए तक के प्रस्ताव स्वीकृत करने का अधिकार है। इसके बावजूद एमआईसी ने कंपनी को एक वर्ष का एक्सटेंशन देने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार 4 करोड़ रुपए प्रतिमाह की दर से सालाना 48 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है।


सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव सामान्य सभा की अनुशंसा के बिना ही शासन को भेजा गया, जबकि नियमानुसार एमआईसी के बाद प्रस्ताव सामान्य सभा से होकर शासन तक जाना चाहिए था। हालांकि सामान्य सभा को भी 10 करोड़ रुपए तक ही स्वीकृति का अधिकार है। फिलहाल शासन स्तर से इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है।
बिना एग्रीमेंट दो महीने से काम
अनुबंध समाप्त होने के बाद भी कंपनी लगातार सफाई कार्य कर रही है। वित्त विभाग के नियमों के अनुसार बिना वैध अनुबंध या शासन की स्वीकृति के भुगतान करने पर ऑडिट आपत्तियां आना तय माना जाता है। अधिकारियों का तर्क है कि यदि अचानक काम रोका जाता तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती।


अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने कहा कि एमआईसी से प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और शासन की मंजूरी के बाद ही भुगतान किया जाएगा। शहर की सफाई प्रभावित न हो, इसलिए कंपनी काम कर रही है।
56 से 70 वार्ड, खर्च 18 से बढ़कर 48 करोड़
अगस्त 2018 में दिल्ली लायंस सर्विसेस को जीआईएस आधारित मैकेनाइज्ड और मैकेनिकल स्वीपिंग का ठेका 1 करोड़ 55 लाख 75 हजार रुपए प्रतिमाह (सालाना लगभग 18.69 करोड़ रुपए) में तीन वर्षों के लिए दिया गया था। टेंडर शर्तों के अनुसार हर वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ भुगतान होना था।
उस समय शहर में 56 वार्ड थे। बाद में 18 गांव शामिल होने से वार्डों की संख्या बढ़कर 70 हो गई। अब 70 वार्डों में सफाई के लिए 48 करोड़ रुपए सालाना खर्च का प्रस्ताव है।
2019 में अनुबंध समाप्ति के समय एमआईसी से प्रस्ताव पारित कर दो वर्ष का एक्सटेंशन अगस्त 2023 तक दिया गया था। इसके बाद कंपनी बिना औपचारिक एक्सटेंशन के कार्य करती रही। बाद में शासन स्तर से एक्सटेंशन की मंजूरी ली गई। वर्ष 2025 में इसी कंपनी को 47.6 करोड़ रुपए वार्षिक दर से नया ठेका दिया गया। अब पुनः एक वर्ष के एक्सटेंशन का प्रस्ताव भेजा गया है।
जटिल व्यवस्था पर भी सवाल
कंपनी ने सड़कों की सफाई के लिए जीआईएस आधारित टाइप सिस्टम लागू किया है, जिसमें डिवाइडर और बिना डिवाइडर वाली सड़कों का वर्गीकरण किया गया है। आवासीय क्षेत्रों को 400 भागों और व्यावसायिक क्षेत्रों को 75 भागों में बांटकर रूट चार्ट और बीट सिस्टम तैयार किया गया है। यह व्यवस्था पार्षदों और आम नागरिकों की समझ से परे बताई जा रही है। शहर में कई स्थानों पर समय पर कचरा न उठने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
पारदर्शिता पर विपक्ष के सवाल
विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि 48 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को सीधे शासन को भेजना और सामान्य सभा में चर्चा न करना नियमों की अनदेखी है। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है।
फिलहाल शासन की मंजूरी का इंतजार है। जब तक स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक भुगतान की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है और यह मामला वित्तीय व कानूनी दृष्टि से चर्चा का विषय बना हुआ है।

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