

बिलासपुर।
गरियाबंद जिले के दुत्काइयां ग्राम में घटित घटनाओं को लेकर ‘सांप्रदायिक दंगा’ बताकर पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार किए जाने का आरोप सामने आया है। इस संबंध में एक ज्ञापन जिलाधीश बिलासपुर को सौंपा गया है, जिसकी प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ समाज-विरोधी तत्व जानबूझकर दुत्काइयां ग्राम की घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देकर प्रस्तुत कर रहे हैं और इसके जरिए पुलिस प्रशासन की विफलता तथा राज्य सरकार को अल्पसंख्यक विरोधी बताने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञापनकर्ताओं का दावा है कि यह दुष्प्रचार भ्रामक, तथ्यहीन और वास्तविकता से परे है।
ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2024 में दुत्काइयां ग्राम स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर को क्षतिग्रस्त करने और मंदिर परिसर में आपत्तिजनक कृत्य मूत्र त्याग किए जाने की घटना सामने आई थी, जिससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसके अलावा आरिफ, नसरुद्दीन ,राजू खान, शहाबुद्दीन कुरेशी, दौलत बी आदि द्वारा साहू भवन पर अवैध कब्जा कर लंबे समय तक नमाज अदा करने का आरोप लगाया गया है, जिससे गांव में सामाजिक तनाव की स्थिति बनी।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में जमानत पर रिहा हुए आरिफ द्वारा प्रकरण के गवाहों के साथ लाठी, रॉड, चाकू से मारपीट कर उसका वीडियो सार्वजनिक किया गया, ताकि गांव में दहशत का माहौल बनाया जा सके। इसके साथ ही गोठान भूमि और रावण भाटा स्थल पर अवैध कब्जे तथा रावण के प्रतीक चिन्ह को क्षति पहुंचाने जैसे कृत्य किये गए हैं।

हिन्दू संगठनों से जुड़े ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि यह मामला किसी भी प्रकार से सांप्रदायिक दंगा नहीं, बल्कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों द्वारा उकसावे और उसके प्रतिकार को गलत रूप देने का प्रयास है। उन्होंने आशंका जताई है कि ऐसे कृत्य प्रदेश की सामाजिक समरसता और शांति के लिए खतरा बन सकते हैं।
इस पर ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि दुत्काइयां ग्राम से जुड़े समस्त घटनाक्रम की निष्पक्ष, तथ्यात्मक और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही संलिप्त व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत और संपत्तियों की जांच, मंदिर, साहू भवन, गोठान और रावण भाटा से जुड़े अवैध कब्जों पर वैधानिक कार्रवाई तथा गवाहों के साथ मारपीट और धमकी देने के मामलों में कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
इसके अलावा प्रशासन से वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक कर कथित झूठे सांप्रदायिक दुष्प्रचार पर रोक लगाने का भी आग्रह किया गया है। ज्ञापन में छत्तीसगढ़ को शांति और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताते हुए समय रहते सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
