चंद्रमा की रोशनी में रखी जाएगी खीर, मां लक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि की कामना; शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन

बिलासपुर। शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और महाआरती होगी। रात 12 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खीर का प्रसाद वितरित किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि अगले दिन सुबह तक रहने के कारण सोमवार, 26 अक्टूबर को स्नान-दान के अनुष्ठान होंगे। इसी दिन श्वास और दमा के मरीजों को आयुर्वेदिक औषधियां बांटने का आयोजन भी किया जाएगा।

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत के समान लाभकारी होती हैं। इसी विश्वास के चलते लोग रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो लोग जागकर उनकी आराधना करते हैं, उन पर देवी की कृपा बनी रहती है। इसी कारण श्रद्धालु मां लक्ष्मी और इंद्र की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से भी माना जाता है। इस दिन मंदिरों में भगवान का श्वेत वस्त्रों, सफेद फूलों और मोतियों से विशेष श्रृंगार किया जाता है। घरों में पूजा-पाठ, दीपदान और खीर का भोग लगाने की परंपरा है। सोमवार को पूर्णिमा के अवसर पर स्नान-दान के साथ महर्षि वाल्मीकि जयंती भी मनाई जाएगी।

शहर के सिम्स चौक स्थित व्यंकटेश मंदिर में रविवार शाम 7:30 बजे भगवान को श्वेत मंडप में विराजमान कराया जाएगा। रात 8 बजे से भजन-कीर्तन और मध्यरात्रि में महाआरती के बाद प्रसाद वितरण होगा। घोंघा बाबा मंदिर में शाम 4 बजे विशेष पूजा और सवामनी का भोग लगाया जाएगा। रात 8 से 11 बजे तक भजन-कीर्तन के बाद दूध की खीर बांटी जाएगी। सदर बाजार स्थित लक्ष्मी मंदिर और मध्य नगरीय चौक के राधा-कृष्ण मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण होगा। हरदेव लाल मंदिर में 50 लीटर दूध से खीर तैयार की जाएगी।

इधर, रिवर व्यू में 'कविता चौपाटी से' की ओर से शरद उत्सव और कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कवियों ने गीत, कविता और शरद पूर्णिमा पर आधारित रचनाओं की प्रस्तुति दी। इस दौरान अवधेश अग्रवाल की दो रचनाओं का अनावरण भी किया गया।

शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों में होने वाले आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, खीर प्रसाद और दान-पुण्य के माध्यम से लोग इस पर्व को परंपरा और आस्था के साथ मनाएंगे।