खेतों से बाजार तक सावधान मुद्रा में खड़े होकर राष्ट्रगीत गाते हैं ग्रामीण, स्कूल-अस्पताल से लेकर घरों तक दिखता है देशप्रेम का अनूठा नजारा
बिलासपुर। घड़ी की सुई जैसे ही शाम के ठीक 4 बजे का संकेत देती है, बिल्हा ब्लॉक का लखराम गांव कुछ पलों के लिए थम जाता है। लाउडस्पीकर से आवाज गूंजती है- 'सावधान हो जाइए, राष्ट्रगीत बजने वाला है।' इसके साथ ही गांव में जहां जो भी होता है, वहीं सावधान मुद्रा में खड़ा हो जाता है। ठीक 4 बजे 30 लाउडस्पीकरों से राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की स्वर लहरियां गूंजने लगती हैं। स्कूल, अस्पताल, बैंक, बाजार, गलियों और खेतों में मौजूद ग्रामीण एक साथ राष्ट्रगीत गाते हैं। राष्ट्रगीत पूरा होते ही सभी फिर अपने-अपने काम में जुट जाते हैं।
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ग्राम पंचायत लखराम ने यह अनूठी पहल शुरू की है। करीब 8 हजार की आबादी वाले इस गांव में ग्रामसभा ने तय किया कि देश के प्रति सम्मान जताने के लिए सभी लोगों का किसी एक स्थान पर जुटना जरूरी नहीं है। गांव में हर व्यक्ति जहां भी हो, वहीं से राष्ट्रगीत में सहभागी बन सकता है।
सरपंच रुक्मणि साहू और ग्रामीणों ने पहले पूरे गांव का सर्वे कराया। इसके बाद 30 लाउडस्पीकर इस तरह लगाए गए कि उनकी आवाज स्कूल, अस्पताल, बैंक, बाजार और दूर-दराज के खेतों तक पहुंच सके। गुरुवार से शुरू हुई इस पहल ने गांव के लोगों को एक सूत्र में जोड़ दिया है।
दुकान से खेत तक एक साथ गूंजता है राष्ट्रगीत
लखराम में शाम 4 बजे का नजारा खास होता है। बाजार में दुकान पर मोलभाव कर रहे ग्राहक और सामान बेच रहे व्यापारी कुछ देर के लिए रुककर सावधान मुद्रा में खड़े हो जाते हैं। गलियों में खेल रहे बच्चे सीधे तनकर खड़े हो जाते हैं। घरों में रसोई का काम कर रही महिलाएं भी कुछ पल के लिए अपने हाथ रोककर राष्ट्रगीत में शामिल होती हैं।
महतारी सदन में महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं, बैंक के कर्मचारी, अस्पताल का स्टाफ और खेतों में काम कर रहे किसान अलग-अलग जगहों पर रहते हुए भी एक ही समय पर राष्ट्रगीत गाते हैं। गांव के लोगों के लिए यह केवल राष्ट्रगीत बजाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता और देश के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम बन गई है।
गांव के विकास और स्वास्थ्य में भी काम आएगा साउंड सिस्टम
पंचायत ने 30 लाउडस्पीकरों का नेटवर्क केवल राष्ट्रगीत तक सीमित नहीं रखने की योजना बनाई है। सरपंच रुक्मणि साहू के मुताबिक, इस सिस्टम का इस्तेमाल बच्चों के टीकाकरण और पोलियो की दवा पिलाने संबंधी सूचना देने, फसलों में बीमारी फैलने पर कृषि अधिकारियों की सलाह पहुंचाने और पंचायत की जरूरी घोषणाओं के लिए भी किया जाएगा।
इससे गांव के दूरस्थ हिस्सों में रहने वाले लोगों तक भी समय पर जरूरी जानकारी पहुंचाई जा सकेगी। पंचायत का मानना है कि एक ही नेटवर्क के जरिए राष्ट्रगीत के साथ जनहित से जुड़ी सूचनाएं भी पूरे गांव तक पहुंचाई जा सकती हैं।
राष्ट्रगान की पहल पहले, राष्ट्रगीत का ऐसा मॉडल संभवत: पहली बार
देश के अलग-अलग हिस्सों में लाउडस्पीकरों के माध्यम से राष्ट्रगान बजाने और लोगों को एक साथ जोड़ने की पहल पहले भी हो चुकी है। तेलंगाना के करीमनगर जिले के जम्मीकुंटा और नलगोंडा के थिप्पार्थी में सुबह लाउडस्पीकरों के जरिए राष्ट्रगान बजाने की व्यवस्था की गई थी। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के भनकपुर गांव में भी प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर ऐसी पहल की थी।
वहीं, केरल के अलाप्पुझा जिले की कंजिकुझी पंचायत में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों ने अपने-अपने घरों में एक ही समय पर राष्ट्रगान गाया था। इस अभियान में करीब 10 हजार लोग जुड़े थे।
लखराम की खासियत यह है कि यहां शाम 4 बजे पूरे गांव में एक साथ राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' गाने की व्यवस्था की गई है। इसे राष्ट्रगीत के माध्यम से पूरे गांव को एक साथ जोड़ने की अनूठी पहल माना जा रहा है।