बिलासपुर की बदहाल सड़कों और सेंदरी-मोपका बायपास पर हाई कोर्ट नाराज, एनएचएआई ने 31 अक्टूबर तक गड्ढे भरने का दिया भरोसा
बिलासपुर। शहर की बदहाल सड़कों और निर्माण कार्यों में देरी को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और बिलासपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़कों का निर्माण और उनका रखरखाव संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है, कोर्ट का काम नहीं। इसके बावजूद विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय हर बार कोर्ट के आदेश का इंतजार करते हैं, जो उचित नहीं है। मामले की अगली सुनवाई नवंबर में दिवाली के बाद होगी।
सड़कों की बदहाली से संबंधित जनहित याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, एनएचएआई और नगर निगम की ओर से शपथ पत्र पेश किए गए। कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की स्थिति, सेंदरी-मोपका बायपास को एनएचएआई को सौंपने में देरी और बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना की प्रगति पर जानकारी ली। रायपुर के धनेली-विधानसभा मार्ग को लेकर 8 अप्रैल 2025 के आदेश के पालन की जानकारी भी मांगी गई थी।
31 अक्टूबर तक भरेंगे बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे
सुनवाई के दौरान एनएचएआई ने हाई कोर्ट को बताया कि बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे 31 अक्टूबर तक भर दिए जाएंगे, जबकि बड़े निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरे करने का लक्ष्य है। वहीं, नगर निगम ने बताया कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गड्ढे भरने का काम लगातार जारी है। अब डामरीकरण भी शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत स्वीकृत नई सड़कों का निर्माण भी शुरू करने की जानकारी दी गई।
डामर की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होने का मुद्दा भी सामने आया। इस पर राज्य सरकार की ओर से दो-तीन दिन में निर्णय लेने की बात कही गई।
पांच साल से चल रही सुनवाई, फिर भी नहीं सुधरी सड़कों की हालत
हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि प्रदेश की सड़कों की स्थिति को लेकर वर्ष 2021 से जनहित याचिका लंबित है। इसके साथ दो अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई हो रही है। 7 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने कहा था कि इतने वर्षों बाद भी सड़कों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की हालत विशेष रूप से चिंताजनक है।
पिछली सुनवाई में निगम की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ था। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए निगम आयुक्त को अगली तारीख पर स्वयं उपस्थित होने या निगम का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। बुधवार को निगम के अधिवक्ता उपस्थित हुए और मरम्मत कार्यों की रिपोर्ट पेश की।
सेंदरी-मोपका बायपास के हैंडओवर दस्तावेज सौंपे
सेंदरी-मोपका बायपास के रखरखाव को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया। एनएचएआई ने पहले बताया था कि बायपास का संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर संभाग क्रमांक-1 के पास है, जबकि पीडब्ल्यूडी ने इसे हैंडओवर करने की जानकारी दी थी। बुधवार को एनएचएआई ने कोर्ट को बताया कि बायपास हस्तांतरित करने से संबंधित दस्तावेज पीडब्ल्यूडी ने उसी दिन सौंपे हैं।
बारिश के दौरान इस बायपास पर बने गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बने थे। लंबे समय से रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित होने के सवाल भी उठते रहे हैं।
78 पेज की रिपोर्ट में निगम ने गिनाए मरम्मत कार्य
नगर निगम ने हाई कोर्ट में 78 पेज की रिपोर्ट पेश कर शहर के अलग-अलग जोन में कराए गए पेचवर्क का ब्योरा दिया। रिपोर्ट में काम से पहले और बाद की तस्वीरें भी शामिल हैं। निगम के अनुसार, मुख्य मार्गों से लेकर कॉलोनियों तक सड़क की मरम्मत कराई गई है।
जोन क्रमांक-1 में मंगला चौक से आजाद चौक पहुंच मार्ग, कांतिपारा, एसईसीएल मुख्य मार्ग और शनिचरी बाजार में मरम्मत कराई गई। जोन क्रमांक-2 में शिवा चौक जन स्वास्थ्य केंद्र, विष्णु चौक और रायपुर रोड पर पेचवर्क की जानकारी दी गई। जोन क्रमांक-3 में विजय वंदना हॉस्पिटल से उसलापुर ओवरब्रिज तक, गौरव पथ और शिवनाथ मार्ग पर मरम्मत का उल्लेख है।
इसी तरह जोन क्रमांक-6 के वार्ड 39, 41, 42, 43, 44 और 45 सहित विभिन्न क्षेत्रों तथा जोन क्रमांक-7 में भवानी चौक और आसपास के स्थानों पर पेचवर्क कराने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में गड्ढे भरने और सड़क की उखड़ी सतह को दुरुस्त करने की जानकारी दी गई है।
सड़कों की मरम्मत के लिए विभागों को खुद करनी होगी पहल
हाई कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर सड़कों के निर्माण, रखरखाव और विभागों के बीच समन्वय का मुद्दा सामने ला दिया है। बिलासपुर-रायपुर सड़क के गड्ढे भरने के लिए 31 अक्टूबर की समयसीमा तय की गई है, जबकि अन्य निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। अब इन समयसीमाओं के भीतर काम पूरा होता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी। मामले की अगली सुनवाई नवंबर में दिवाली के बाद होगी।