बिलासपुर। सिविल लाइन पुलिस ने लोन दिलाने के नाम पर लोगों की निजी जानकारी का इस्तेमाल कर ठगी की तैयारी करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अग्रसेन चौक स्थित सुपर मार्केट में संचालित ट्रस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज कार्यालय में छापा मारकर संचालिका सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने करीब एक लाख लोगों का निजी डेटा खरीदकर उसका उपयोग लोगों से संपर्क साधने और उन्हें लोन का झांसा देने के लिए किया था।
पुलिस के अनुसार ईदगाह चौक निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई की गई। शिकायत में बताया गया था कि ट्रस्ट फाइनेंशियल सर्विसेज के कर्मचारी मोबाइल फोन के माध्यम से लोगों को विभिन्न प्रकार के लोन दिलाने का प्रलोभन दे रहे हैं। सूचना के आधार पर थाना सिविल लाइन प्रभारी किशोर केवट ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद कार्यालय में दबिश दी।
छापेमारी के दौरान पूछताछ में डेटा संग्रहण और उसके इस्तेमाल से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने मामले में कार्यालय संचालिका उषा कश्यप, अमन राठौर और शेख जुनैद खान को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 62, 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 72(1) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
ऐसे जुटाया जाता था लोगों का डेटा
पुलिस जांच में पता चला है कि जांजगीर-चांपा निवासी और वर्तमान में तारबहार क्षेत्र में रहने वाली उषा कश्यप पिछले करीब एक वर्ष से पर्सनल, होम, बिजनेस और वाहन लोन दिलाने के नाम पर कार्यालय संचालित कर रही थी।
वहीं, सीपत निवासी शेख जुनैद खान लोगों से रियल एस्टेट संबंधी जानकारी के बहाने संपर्क कर उनके मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियां एकत्र करता था। इसके अलावा सरकारी विभागों और ऑनलाइन डायरेक्टरी से भी बड़ी मात्रा में डेटा जुटाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि अमन राठौर ने लगभग एक लाख लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबरों का डेटा मात्र 5 हजार रुपए में उषा कश्यप को बेचा था।
पांच हजार रुपए में हुआ एक लाख लोगों के डेटा का सौदा
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के पास बड़ी संख्या में लोगों की निजी जानकारी मौजूद थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि करीब एक लाख लोगों का डेटा केवल 5 हजार रुपए में खरीदा-बेचा गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह डेटा किन स्रोतों से हासिल किया गया और इसके आधार पर कितने लोगों से संपर्क किया गया।
सिविल लाइन पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से अन्य लोग जुड़े हैं या नहीं तथा किसी व्यक्ति से ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया है या नहीं।