बिलासपुर। शहर के कई वार्डों में पेयजल आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कहीं पानी नहीं पहुंच रहा है, कहीं लो-प्रेशर के कारण पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, तो कई इलाकों में लोगों को मटमैला पानी मिलने की शिकायत है। बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार मगरपारा, तालापारा और चिंगराजपारा क्षेत्रों में लंबे समय से लो-प्रेशर की समस्या बनी हुई है। वहीं नेहरू नगर के शांति नगर और कुदुदंड के कई इलाकों में पिछले एक सप्ताह से मटमैला पानी आने की शिकायतें मिल रही हैं। दूसरी ओर देवरीखुर्द के दो वार्डों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने से सैकड़ों परिवार टैंकरों के भरोसे हैं।
शांति नगर के रहवासियों का कहना है कि वे पार्षद और नगर निगम के जल विभाग में कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पाइपलाइन लीकेज या अन्य तकनीकी कारणों से गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, लेकिन इसकी जांच तक नहीं की गई है।
अनियमित समय पर हो रही जलापूर्ति
मगरपारा और तालापारा क्षेत्र के लोगों ने जलापूर्ति के समय को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि शाम को कभी 6 बजे तो कभी 7 या 8 बजे पानी आता है और वह भी केवल आधे घंटे के लिए। इस दौरान कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।
नगर निगम में उप नेता प्रतिपक्ष संतोषी रामा बघेल ने बताया कि शाम की जलापूर्ति की टाइमिंग पूरी तरह अनियमित है। साथ ही कई क्षेत्रों में मटमैला पानी आने की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में नगर निगम को शिकायत दी गई है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
10 हजार घर प्रभावित
व्यापार विहार स्थित त्रिवेणी जल टंकी से वार्ड क्रमांक 23 से 27 तक तालापारा, मगरपारा, कुम्हारपारा, फकीर मोहल्ला और यादव मोहल्ला समेत करीब 10 हजार घरों में पानी की सप्लाई की जाती है। इन क्षेत्रों के लगभग दो हजार घर लो-प्रेशर की समस्या से प्रभावित हैं।
बताया जा रहा है कि त्रिवेणी जल टंकी की क्षमता 21 लाख लीटर है, जबकि करीब 5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के नेटवर्क में ही लगभग 7 लाख लीटर पानी भर जाता है। इसके अलावा जलस्तर में गिरावट के कारण टंकी भी पूरी क्षमता से नहीं भर पा रही है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
शहरवासियों ने नगर निगम से जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार, मटमैले पानी की जांच और लो-प्रेशर की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।