बिलासपुर। दीपावली महापर्व पर इस बार 8 नवंबर को श्री महालक्ष्मी, गणेश और भगवान कुबेर का पूजन किया जाएगा। पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के अनुसार रविवार को अमावस्या तिथि सुबह 11:28 बजे प्रारंभ होगी। शाम को वृषभ स्थिर लग्न में महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त 5:46 से 7:44 बजे तक रहेगा। वहीं, 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या के अवसर पर सुबह स्नान, दान-पुण्य, पितृ तर्पण और मंत्र-जप जैसे धार्मिक कर्म किए जाएंगे।

आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि दीपावली पंच दिवसीय महापर्व का महत्वपूर्ण अवसर है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। धन, संपत्ति, संतान, यश और मान-सम्मान की कामना के साथ जीवन में उत्तम स्वास्थ्य का भी विशेष महत्व है। भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य का देवता माना गया है। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की उपस्थिति सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। दीपावली के साथ रूप चतुर्दशी, अन्नकूट और भाई-बहन के स्नेह से जुड़े पर्व भी परिवार और समाज को जोड़ते हैं।

8 नवंबर को महालक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

दीपावली के दिन प्रदोष काल शाम 5:21 से 7:55 बजे तक रहेगा। वृषभ स्थिर लग्न शाम 5:46 से 7:44 बजे तक है। इसी अवधि में श्री गणेश, महालक्ष्मी और कुबेर पूजन के साथ बही-खाता, तिजोरी, धन-संपत्ति तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों का पूजन करना श्रेष्ठ बताया गया है। इस दौरान शुभ-लाभ की कामना के साथ दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।

रविवार को राहुकाल दोपहर 3:57 से शाम 5:21 बजे तक, यमगण्ड सुबह 11:45 से दोपहर 1:09 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 2:33 से 3:57 बजे तक रहेगा।

9 नवंबर को सोमवती अमावस्या

सोमवार को अमावस्या तिथि दोपहर लगभग 12:32 बजे तक रहेगी। इस दिन अमृत चौघड़िया सुबह 6:09 से 7:33 बजे तक और शुभ चौघड़िया सुबह 8:57 से 10:21 बजे तक रहेगा। इस अवसर पर स्नान, संकल्प, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और मंत्र-जप करने का विधान बताया गया है। सोमवार को राहुकाल सुबह 7:33 से 8:57 बजे तक, यमगण्ड सुबह 10:21 से 11:45 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 1:08 से 2:32 बजे तक रहेगा।

आचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं से स्वच्छता और शुद्धता के साथ पूजन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि माता महालक्ष्मी की कृपा से सभी के जीवन में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि आए तथा व्यापार में उन्नति हो।