महामाया मंदिर में 19 कमरों में जलेंगी 30 हजार ज्योति, 300 लोग करेंगे 8-8 घंटे निगरानी

तेल-घी पर इस बार 1.23 करोड़ खर्च, पिछले साल से करीब 19.75 लाख रुपए ज्यादा; मंदिरों में अलग-अलग परंपराओं के अनुसार जलेगी ज्योति

बिलासपुर। शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगी। शहर से लेकर रतनपुर तक देवी मंदिरों में तैयारियां अंतिम दौर में हैं। 16 प्रमुख मंदिरों में इस बार कुल 39,093 ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। मंदिरों में ज्योति कक्षों की रंगाई-पुताई के साथ कलशों को व्यवस्थित करने का काम चल रहा है। सबसे बड़ी तैयारी रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर में है, जहां 19 कमरों में 30 हजार ज्योति कलश जलेंगे। एक कमरे में करीब 1550 से 1600 ज्योति रखने की तैयारी है। नौ दिनों तक ज्योति लगातार जलती रहे, इसके लिए करीब 300 लोग 8-8 घंटे की तीन पालियों में निगरानी करेंगे।

मां महामाया मंदिर में इस बार ज्योति के लिए तेल और घी की खरीदी पर पिछले साल की तुलना में करीब 19.75 लाख रुपए अधिक खर्च हो रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि नौ दिनों तक ज्योति जलाने के लिए 3 हजार टीन तेल और 500 टीन घी खरीदा गया है। इस बार तेल की कीमत 2375 रुपए प्रति टीन है। 3 हजार टीन तेल पर 71.25 लाख रुपए खर्च होंगे। पिछले साल 2500 टीन तेल 2200 रुपए प्रति टीन की दर से खरीदा गया था, जिस पर करीब 55 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस तरह तेल पर इस बार 16.25 लाख रुपए अधिक खर्च हो रहे हैं।

इसी तरह घी की कीमत भी बढ़ी है। पिछले साल देवभोग का 500 टीन घी 9800 रुपए प्रति टीन की दर से खरीदा गया था, जिस पर करीब 49 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस बार घी की कीमत 10,500 रुपए प्रति टीन है और 500 टीन पर 52.50 लाख रुपए खर्च होंगे। इस तरह तेल और घी पर कुल 1 करोड़ 23.75 लाख रुपए खर्च होने जा रहे हैं। मंदिर में ज्योति के लिए 9 अक्टूबर तक रसीद काटी जाएगी।

महामाया में इस बार 5 हजार घी की ज्योति

चैत्र नवरात्रि में महामाया मंदिर में करीब 25 हजार ज्योति जली थीं। इस बार ज्योति की संख्या बढ़ाकर 30 हजार की गई है। इनमें करीब 5 हजार ज्योति घी की होंगी। ज्योति कक्षों में दीपक व्यवस्थित करने का काम अंतिम चरण में है।

तिफरा काली मंदिर में 3500 ज्योति

16 प्रमुख मंदिरों में बड़ी संख्या में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। रतनपुर महामाया मंदिर में 30 हजार और तिफरा काली मंदिर में 3500 ज्योति कलश जलेंगे। इसके अलावा शहर के अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में भी बड़ी संख्या में मनोकामना और अखंड ज्योति की तैयारी की जा रही है।

22 से अधिक कैमरों से निगरानी, 100 से ज्यादा जवान तैनात

नवरात्रि के दौरान रतनपुर में सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष फोकस रहेगा। मां महामाया मंदिर परिसर और आसपास 22 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। नवरात्रि के मुख्य दिनों में रतनपुर और कोटा थाने के 100 से अधिक पुलिस जवान तैनात रहेंगे। मंदिर के 15 निजी सुरक्षा गार्ड और कॉलेज के 50 एनसीसी-एनएसएस स्वयंसेवक भी भीड़ प्रबंधन में सहयोग करेंगे। श्रद्धालुओं के लिए 5 एकड़ क्षेत्र में पार्किंग तैयार की जा रही है। प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं। वीआईपी दर्शन के लिए भी अलग प्रवेश द्वार रहेगा। सड़क पर बैरिकेडिंग की जाएगी और ट्रैफिक व्यवस्था को देखते हुए नवरात्रि के दौरान बड़ी गाड़ियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा।

मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए 12 पंडित दुर्गासप्तशती पाठ करेंगे, जबकि चंडी यज्ञ 29 पंडितों द्वारा कराया जाएगा। श्रीमद् देवी भागवत कथा में 3 पंडित रहेंगे। गर्भगृह में 4 पंडितों के अलावा अन्य पूजा-अनुष्ठान के लिए 15 पंडित मौजूद रहेंगे।

कहीं तिल के तेल तो कहीं सिर्फ गाय के घी की ज्योति

शहर के मंदिरों में ज्योति प्रज्ज्वलित करने की अपनी अलग-अलग परंपराएं हैं। सदर बाजार स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में मनोकामना ज्योति के लिए केवल तिल के तेल का उपयोग किया जाता है। मंदिर समिति बाजार से तेल खरीदने के बजाय तिल मंगवाकर उसकी सफाई करवाती है और उससे तेल निकलवाकर ज्योति जलाती है।

सरकंडा स्थित पीतांबरा पीठ में केवल गाय के घी की ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है। यहां तेल की ज्योति नहीं जलाई जाती। चांटीडीह के गायत्री मंदिर में व्यक्तिगत मनोकामना के बजाय जिले के कल्याण और समाज की सुख-समृद्धि के लिए सद्भावना ज्योति जलाई जाती है। यह परंपरा पिछले 27 वर्षों से चली आ रही है। रेलवे क्षेत्र स्थित मां त्रिपुर सुंदरी मरी माई मंदिर में पिछले 34 वर्षों से संतान प्राप्ति की कामना लेकर श्रद्धालु मनोकामना ज्योति जला रहे हैं।

काली मंदिर और दुर्गा मंदिर में वर्षों से अखंड ज्योति

तिफरा काली मंदिर में 1980 से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित है। इसके अलावा 1990 में बद्रीनाथ और केदारनाथ से लाई गई अखंड ज्योति भी लगातार जल रही है। जरहाभाठा दुर्गा मंदिर में 1995 में वैष्णो देवी से लाई गई अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित है।