गोंड़वाना गोंड़ महासभा ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 15 अक्टूबर को समाज के वरिष्ठजन मंदिर पहुंचकर करेंगे सेवा-अर्जी समर्पित
बिलासपुर। रतनपुर स्थित महामाया मंदिर में गोंड़ी नेग-नियम के अनुसार पारंपरिक पूजा पद्धति बहाल करने और मंदिर ट्रस्ट में गोंड़ सहित अन्य आदिवासी समाजों को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने की मांग उठी है। छत्तीसगढ़ गोंड़वाना गोंड़ महासभा ने इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया है। महासभा ने 15 अक्टूबर को समाज के वरिष्ठजनों के मंदिर पहुंचकर पारंपरिक रीति-रिवाज से सेवा-अर्जी समर्पित करने की घोषणा भी की है।
महासभा के अनुसार, रतनपुर की महामाई दाई आदिवंशीय गोंड़ समाज की कुलदेवी हैं। समाज का दावा है कि 1970 के दशक तक गोंड़ समाज के बैगा पारंपरिक गोंड़ी रीति-रिवाजों के अनुसार देवी की पूजा-अर्चना करते थे और सेवा-अर्जी की परंपरा निभाते थे। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने और मंदिर परिसर के विकास के दौरान पूजा पद्धति में बदलाव आया। महासभा का आरोप है कि इसके बाद गोंड़ बैगा को पूजा और सेवा की परंपरा से अलग कर दिया गया।
महासभा ने मांग की है कि मंदिर में गोंड़ी नेग-नियम के अनुसार पारंपरिक पूजा पद्धति को फिर से स्थान दिया जाए, ताकि समाज की धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का संरक्षण हो सके। इसके साथ ही मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में गोंड़ सहित अन्य आदिवासी समाजों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने की मांग भी की गई है।
महासभा के पदाधिकारियों के अनुसार, 15 अक्टूबर को समाज के वरिष्ठजन महामाया मंदिर पहुंचकर सेवा-अर्जी समर्पित करेंगे। इस पहल के जरिए समाज अपनी पारंपरिक पूजा पद्धति और मंदिर प्रबंधन में भागीदारी से जुड़े मुद्दों को सामने रखेगा।