बिलासपुर। शहर के बीचों-बीच मगरपारा इलाके में नजूल जमीन पर कथित अवैध प्लॉटिंग का बड़ा मामला सामने आया है। एक ही खसरा नंबर से लगातार नामांतरण के आवेदन आने के बाद नजूल विभाग ने जांच शुरू की तो जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचने, ले-आउट में सड़क और रास्ते के लिए छोड़ी जाने वाली जमीन का भी विक्रय करने तथा खरीदारों को दूसरे खसरा नंबर की जमीन पर कब्जा दिए जाने की जानकारी सामने आई। मामले में नजूल विभाग ने 34 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। साथ ही संबंधित जमीन का पट्टा निरस्त करने की चेतावनी दी गई है।

मामला मगरपारा के शीट नंबर 24 और प्लॉट नंबर 15/1-2 से जुड़ा है। नजूल विभाग के अनुसार मौजा जूना बिलासपुर स्थित खसरा नंबर 15/1 की करीब 28,860 वर्गफुट जमीन पर बिना ले-आउट स्वीकृत कराए छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बिक्री किए जाने की बात सामने आई है। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन माया नागदौने के नाम दर्ज बताई गई है। जमीन को करीब 22 टुकड़ों में बांटकर बेचने के बाद खरीदारों ने नामांतरण के लिए नजूल न्यायालय में आवेदन देना शुरू किया।

एक ही खसरा नंबर से लगातार नामांतरण आवेदन आने पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद राजस्व निरीक्षकों की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि वास्तविक जमीन से अधिक रकबे की बिक्री और खरीदारों को दूसरे खसरे की जमीन पर कब्जा देने की स्थिति बनी हुई है।

रास्ते की जमीन भी बेचने का आरोप

नजूल विभाग की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि खसरा नंबर 623 के कुछ हिस्से को मिलाकर अवैध प्लॉटिंग की गई। करीब 28,860 वर्गफुट रकबे वाले इस भूखंड का बिना ले-आउट स्वीकृत कराए छोटे-छोटे टुकड़ों में करीब 15 लोगों को विक्रय किया गया। आरोप है कि ले-आउट में सड़क और रास्ते के लिए निर्धारित जमीन भी बेच दी गई तथा खरीदारों को खसरा नंबर 623 की भूमि पर कब्जा दिया गया।

मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि संबंधित जमीन आवासीय प्रयोजन के लिए पट्टे पर दी गई थी। नजूल विभाग के अनुसार पट्टे की शर्तों का उल्लंघन करते हुए जमीन का व्यावसायिक उपयोग और अवैध प्लॉटिंग किए जाने की स्थिति सामने आई है।

34 लोगों को कारण बताओ नोटिस

नजूल विभाग ने माया नागदौने पति स्वर्गीय देवेंद्र नागदौने, नवीन नागदौने, निधि नागदौने समेत कुल 34 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने संबंधित पक्षों से पूछा है कि पट्टे की शर्तों के उल्लंघन और कथित अवैध प्लॉटिंग के चलते उनका पट्टा निरस्त क्यों न किया जाए। सभी संबंधित पक्षों को सात दिन के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

नजूल अधिकारी नारायण गबेल के अनुसार कलेक्टर के निर्देश पर अवैध प्लॉटिंग के मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। खसरा नंबर 15/1 से संबंधित दो से तीन नामांतरण प्रकरण पहले ही खारिज किए जा चुके हैं। अब संबंधित भूमि का पट्टा निरस्त करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित है।

धोखाधड़ी के पहलू की भी जांच की मांग

मामले में जमीन की अवैध प्लॉटिंग के साथ-साथ खरीदारों को किसी अन्य खसरा नंबर की जमीन पर कब्जा दिए जाने का आरोप भी गंभीर माना जा रहा है। यदि जांच में रजिस्ट्री में दर्शाए गए खसरा नंबर और मौके पर दिए गए कब्जे में अंतर की पुष्टि होती है, तो प्रकरण में धोखाधड़ी समेत अन्य कानूनी पहलुओं की जांच का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल नजूल विभाग ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जवाब और जांच के बाद ही जमीन के पट्टे, नामांतरण तथा अवैध प्लॉटिंग से जुड़े मामलों में आगे की कार्रवाई तय होगी।