बिलासपुर में रात 8:53 बजे चंद्रोदय का अनुमान, बादल और बारिश बढ़ा सकते हैं इंतजार; चांद नहीं दिखे तो निर्धारित समय पर अर्घ्य देकर कर सकेंगी व्रत का पारण

बिलासपुर। पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ महिलाएं गुरुवार, 29 अक्टूबर को करक चतुर्थी यानी करवाचौथ का व्रत रखेंगी। हालांकि इस बार व्रत के दौरान मौसम महिलाओं की परीक्षा ले सकता है। चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश में बादल छाने और बारिश होने की आशंका के बीच रात में चंद्रमा के दर्शन मुश्किल हो सकते हैं। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को चांद निकलने के बाद भी उसके दिखाई देने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। बिलासपुर में चंद्रोदय रात करीब 8:53 बजे होने का अनुमान है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मौसम खराब होने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देने पर भी निर्धारित चंद्रोदय समय पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जा सकता है।

करवाचौथ पर महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार सूर्योदय सुबह 6:49 बजे और चंद्रोदय रात करीब 8:53 बजे होने के अनुसार व्रत की अवधि लगभग 14 घंटे होगी। पंचांग के मुताबिक, चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को सुबह 1:08 बजे से रात 10:11 बजे तक रहेगी। व्रत के दौरान महिलाएं भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा कर पति की दीर्घायु की कामना करेंगी। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और छलनी से चंद्र-दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।

चक्रवात और बादलों के कारण चांद पर संकट

अक्टूबर और नवंबर में मौसम में बदलाव की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में चर्चा में रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले 27 वर्षों में मानसून की विदाई के बाद छह बार करवाचौथ के आसपास चक्रवात या उसके प्रभाव से मौसम प्रभावित हुआ। कई अवसरों पर आसमान में बादल छाए रहने के कारण महिलाओं को चांद के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।

वर्ष 1999 में करवाचौथ 27 अक्टूबर को था, जबकि 29 अक्टूबर को सुपर साइक्लोन आया था। इसके प्रभाव से भी चंद्र-दर्शन में देरी हुई थी। वर्ष 2013 में चक्रवात फैलिन के बाद करवाचौथ के आसपास हल्के बादल छाए रहे। वर्ष 2014 में चक्रवात हुदहुद के प्रभाव से भी चांद देखने में परेशानी हुई। वर्ष 2018 में चक्रवात तितली का असर करवाचौथ तक अपेक्षाकृत कम हो गया था, लेकिन आसमान में बादल बने रहे।

वर्ष 2024 में चक्रवात दाना के प्रभाव के दौरान भी मौसम की स्थिति ने चंद्र-दर्शन को प्रभावित किया। वर्ष 2025 में बादलों के कारण चांद लगभग दो घंटे की देरी से दिखाई देने की जानकारी सामने आई थी। इस बार चक्रवात अर्नब के प्रभाव को लेकर मौसम संबंधी चिंता बनी हुई है। हालांकि चंद्रमा वास्तव में किस समय दिखाई देगा, यह स्थानीय मौसम और आसमान में बादलों की स्थिति पर निर्भर करेगा।

चांद नहीं दिखे तो क्या करें?

करवाचौथ के दौरान चंद्रमा के दर्शन को विशेष महत्व दिया जाता है। महिलाएं चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं और इसके बाद व्रत खोलती हैं। लेकिन बारिश, घने बादलों या धुंध के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देने पर व्रत को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है।

धार्मिक मान्यताओं और पंचांग संबंधी परंपराओं के अनुसार, चंद्रोदय का निर्धारित समय महत्वपूर्ण है। चंद्रमा का आंखों से दिखाई देना हर स्थिति में अनिवार्य नहीं माना जाता। चंद्रोदय एक खगोलीय घटना है और बादलों के कारण चंद्रमा नजर नहीं आने का अर्थ यह नहीं है कि उसका उदय नहीं हुआ।

ऐसी स्थिति में व्रती अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के समय को देखें। निर्धारित समय पर चंद्रमा की दिशा में मुख करके चंद्रदेव का स्मरण करते हुए अर्घ्य अर्पित कर सकती हैं। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार व्रत का पारण कर सकती हैं। विशेष धार्मिक संदेह होने पर अपने पुरोहित या ज्योतिषाचार्य से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

बुधादित्य योग और संकष्टी चतुर्थी का संयोग

इस बार करवाचौथ पर बुधादित्य योग के साथ संकष्टी चतुर्थी का संयोग भी बताया जा रहा है। इसलिए चंद्रदेव की पूजा के साथ भगवान गणेश की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा। गणेश मंदिरों सहित शहर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। महिलाएं पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी।

बारिश के बीच बाजारों में खरीदारी

करवाचौथ को लेकर शहर के बाजारों में भी रौनक दिखाई दी। महिलाएं बारिश और बदले मौसम के बीच करवा, साड़ियां, आभूषण और पूजन सामग्री की खरीदारी करती नजर आईं। सराफा बाजार में सोने-चांदी के दामों में गिरावट के चलते ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ने की जानकारी है। खासकर हल्के वजन के आभूषणों की मांग रही।

अब व्रत रखने वाली महिलाओं की निगाहें मौसम पर टिकी हैं। यदि आसमान में बादल छाए रहते हैं, तो चंद्रमा के दर्शन में परेशानी हो सकती है। ऐसे में स्थानीय चंद्रोदय समय की जानकारी रखना और धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा की तैयारी करना महत्वपूर्ण रहेगा।