बिलासपुर। कोनी के कंचन विहार में एक निजी प्लॉट तक पहुंचने के लिए 25 फीट चौड़े रास्ते को लेकर विवाद गहरा गया है। रविवार को तहसीलदार प्रकाश साहू और पटवारी युगांत सिंह क्षत्री राजस्व मामले की जांच के लिए मौके पर पहुंचे और नापजोख की। मौके पर 25 फीट सड़क के लिए छोड़ी गई जगह, निर्माण और आसपास की जमीन की स्थिति का परीक्षण किया गया। मामला तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन है और राजस्व विभाग रिकॉर्ड तथा मौके की स्थिति का मिलान कर रहा है।


मामले में प्लॉट मालिक सत्यप्रकाश सिंह ठाकुर ने तहसीलदार न्यायालय में आवेदन देकर अपनी जमीन तक पहुंचने के लिए लेआउट में छोड़ी गई 25 फीट सड़क को चालू कराने और रास्ते में किए गए निर्माण को हटाने की मांग की है। उनका दावा है कि कंचन विहार का लेआउट टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से स्वीकृत है तथा उसमें उनके प्लॉट के सामने सड़क के लिए जगह स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है।


विशाल जायसवाल, संजय साहू, राजेंद्र तिवारी और माया शर्मा के नाम आरोप


सत्यप्रकाश ठाकुर ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि करीब दो वर्ष पहले विशाल जायसवाल, संजय साहू, राजेंद्र तिवारी और माया शर्मा उनके प्लॉट के सामने सड़क की जगह पर निर्माण करने का प्रयास कर रहे थे और इसे मंदिर का नाम दिया जा रहा था।


आवेदन में सत्यप्रकाश ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपनी जमीन तक रास्ता देने के बदले 5 लाख रुपए देने का दबाव बनाया गया। उनका कहना है कि दबाव में उन्होंने 50 हजार रुपए नकद और 4.50 लाख रुपए का चेक दिया, लेकिन इसके बाद भी रास्ता उपलब्ध नहीं कराया गया। बाद में उनसे 5 लाख रुपए के अलावा करीब 700 वर्गफीट जमीन देने की मांग किए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया है।


प्रार्थी ने आवेदन में पिन्टू शर्मा का भी नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि वह जमीन संबंधी काम करता है और उसका कॉलोनी से प्रत्यक्ष संबंध नहीं होने के बावजूद रास्ते के बदले उनकी जमीन का हिस्सा मांग रहा है। आवेदन के अनुसार, पिन्टू शर्मा ने पीछे की जमीन देने की मांग भी की।


रास्ते पर बाउंड्रीवाल खड़ी करने का आरोप


सत्यप्रकाश के आवेदन के अनुसार, पूर्व में उनकी जमीन का सीमांकन तहसीलदार के समक्ष कराया गया था। उनके मुताबिक सीमांकन के दौरान पटवारी और आरआई की मौजूदगी में मौके की स्थिति देखी गई और विशाल जायसवाल, विभा डिक्सेना तथा मनीष तिवारी का कब्जा बताए जाने का उल्लेख सीमांकन रिपोर्ट में किया गया है।


प्रार्थी का आरोप है कि इसके बाद पिन्टू शर्मा और विशाल जायसवाल ने उनके आने-जाने के रास्ते को बंद करते हुए तिरछी बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि पिन्टू शर्मा द्वारा उक्त भूमि पर विशाल जायसवाल से अनुबंध होने की बात कही गई है। प्रार्थी का कहना है कि इससे उनकी जमीन तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो गया है।


विक्रेता के शपथपत्र और स्वीकृत लेआउट का हवाला


सत्यप्रकाश ने अपने आवेदन में बताया है कि उनकी जमीन कोनी के खसरा नंबर 390, रकबा 0.30 एकड़ में स्थित है, जिसे उन्होंने 20 नवंबर 2023 को पीयूष पाण्डेय से खरीदा था। उनका कहना है कि पीयूष पाण्डेय ने 2 दिसंबर 2024 को नोटराइज्ड शपथपत्र के माध्यम से 20 फीट रास्ते की सहमति दी थी।


प्रार्थी ने यह भी दावा किया है कि कंचन विहार कॉलोनी के लेआउट में पहले से मंदिर और गार्डन के लिए अलग जगह सुरक्षित है तथा उनके प्लॉट के सामने सड़क दर्शाई गई है। उन्होंने अपने आवेदन के साथ विक्रय पत्र, बी-1, खसरा पांचसाला, सीमांकन रिपोर्ट, रास्ते की सहमति से संबंधित दस्तावेज और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के वर्ष 2005 तथा 2007 के नक्शे संलग्न किए हैं।


2250 वर्गफीट भूमि पर निर्माण और दो प्लॉट की बिक्री की भी जांच


रविवार को राजस्व टीम की मौके पर जांच के दौरान करीब 2250 वर्गफीट वन भूमि पर मकान बने होने और दो प्लॉट की बिक्री की जानकारी भी सामने आई। वहीं प्रार्थी के अनुसार 25 फीट सड़क के लिए छोड़ी गई जगह के आधे हिस्से में मंदिर की नींव डाली गई है। इस बिंदु पर भी राजस्व विभाग द्वारा रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जा रहा है। स्थानीय रिपोर्टों में भी इन बिंदुओं के सामने आने और मामले की जांच जारी होने की पुष्टि की गई है।


कंचन विहार नगर निगम के वार्ड क्रमांक 68 में स्थित है। प्रार्थी के अनुसार कॉलोनी का लेआउट टीएनसीपी से स्वीकृत है और रेरा में पंजीकृत है। ऐसे में स्वीकृत लेआउट में दर्शाए गए रास्ते की वास्तविक स्थिति और मौके पर हुए निर्माण की वैधता जांच का अहम हिस्सा बन गई है।


रास्ता रोकने और धन मांगने के आरोपों की जांच जरूरी


सत्यप्रकाश ठाकुर ने अपने आवेदन में कहा है कि उनकी स्वामित्व वाली जमीन तक पहुंचने का रास्ता किसी भी स्थिति में बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से रास्ते में किए जा रहे निर्माण को रोकने और निर्माण हटाने की मांग की है।


हालांकि, विशाल जायसवाल, संजय साहू, राजेंद्र तिवारी, माया शर्मा, पिन्टू शर्मा, विभा डिक्सेना और मनीष तिवारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष और स्वतंत्र पुष्टि सामने आना बाकी है। राजस्व विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लेआउट में 25 फीट रास्ते की वास्तविक स्थिति क्या है, उस भूमि पर किसका वैध अधिकार है और मौके पर किए गए निर्माण नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।


फिलहाल तहसीलदार न्यायालय में मामला लंबित है और रविवार को की गई नापजोख के बाद राजस्व रिकॉर्ड, स्वीकृत लेआउट और मौके की स्थिति के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। लेकिन अगर सत्य प्रकाश सिंह ठाकुर के आरोप सही है तो फिर यह कॉलोनाइजर के दबंगई का मामला है जो अपनी ताकत का इस्तेमाल कर किसी का न केवल रास्ता रोक रहा है बल्कि उनसे जबरन उगाही भी कर रहा है, जिसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।