12 हजार नक्शे पास, मौके पर 31 हजार मकान, 19 हजार का रिकॉर्ड नहीं

बिलासपुर। नगर निगम के भवन अनुज्ञा रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद मकानों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया है। पिछले छह साल में निगम में करीब 12 हजार मकानों के नक्शे पास हुए, जबकि मौके पर करीब 31 हजार मकान बने मिले हैं। यानी करीब 19 हजार मकानों का मौजूदा भवन अनुज्ञा रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो रहा है। अब निगम इन निर्माणों का सत्यापन कराएगा।

सर्वे में यह जांच होगी कि रिकॉर्ड से बाहर मिले मकानों में कितने बिना अनुमति बने हैं, कितने पुराने निर्माण हैं, किनका रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ और कितने स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं बने हैं। निगम के प्रारंभिक आकलन के अनुसार ऐसे मकानों की पहचान और सत्यापन के बाद हर साल करीब 5 से 6 करोड़ रुपए के राजस्व का अंतर सामने आ सकता है। हालांकि वास्तविक राजस्व नुकसान सर्वे और रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही स्पष्ट होगा।

हर मकान का होगा सत्यापन

निगम जमीन पर मौजूद प्रत्येक मकान को भवन अनुज्ञा और कर रिकॉर्ड से मिलाएगा। सर्वे में निर्माण की स्थिति, जमीन का विवरण, भवन अनुमति और स्वीकृत नक्शे के मुताबिक निर्माण हुआ है या नहीं, इसकी जांच होगी। जिन मकानों से निगम को टैक्स नहीं मिल रहा है, उन्हें रिकॉर्ड में शामिल कर कर वसूली की जाएगी।

आउटर के 9 इलाकों में सबसे ज्यादा अंतर

भवन रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद निर्माण के बीच सबसे ज्यादा अंतर निगम सीमा में शामिल आउटर इलाकों में सामने आ रहा है। मोपका, खमतराई, बहतराई, बिजौर, उसलापुर, सकरी, तिफरा, घुरू और अमेरी में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मकान और कॉलोनियां विकसित हुई हैं। इन क्षेत्रों में बिना अनुमति निर्माण के मामले भी सामने आते रहे हैं।

जीआईएस सर्वे के बाद भी रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाए भवन

निगम पहले जीआईएस सर्वे के साथ भवनों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करा चुका है। इसके बावजूद भवन अनुज्ञा रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद मकानों में इतना बड़ा अंतर सामने आने से सर्वे के बाद भवनों को अनुज्ञा और कर रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अब नए सत्यापन में प्रत्येक भवन की पहचान कर उसे संबंधित रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा।

6,414 भवनों को मिली अनुमति

विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार 2022 से 31 जनवरी 2026 तक बिलासपुर में बिना नक्शा पास कराए संचालित 177 संस्थान पाए गए थे। इसी अवधि में 5,531 आवासीय और 883 व्यावसायिक भवनों सहित कुल 6,414 भवन निर्माण अनुमतियां जारी की गईं। अब निगम का फोकस पुराने और रिकॉर्ड से बाहर भवनों को भी अनुज्ञा, संपत्ति कर समेत अन्य रिकॉर्ड से जोड़ने पर है।

महापौर पूजा विधानी ने कहा कि जोनवार सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिन मकानों से निगम को टैक्स नहीं मिल रहा है, वहां से टैक्स वसूली की जाएगी, ताकि राजस्व नुकसान से बचा जा सके।