रायपुर से बाइक पर गतौरी आ रहे थे भाई, एक ने मौके पर तोड़ा दम; दूसरे की मौत के पीछे एंबुलेंस की देरी पर उठे सवाल
बिलासपुर। दीपावली पर परिवार के साथ खुशियां मनाने घर लौट रहे दो सगे भाइयों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। कोनी थाना क्षेत्र के लोखंडी-तुर्काडीह के बीच मोड़ पर सामने से आ रहे ट्रेलर ने उनकी पल्सर बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में छोटे भाई साहीन सतनामी (19) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल बड़े भाई रितेश सतनामी (22) ने सिम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के बाद ट्रेलर चालक वाहन लेकर फरार हो गया।
दोनों भाई ग्राम गतौरी निवासी देव कुमार बघेल के बेटे थे। करीब एक महीने पहले वे काम की तलाश में रायपुर गए थे। वहां अपने जीजा कपिस पाटले के साथ कूलर और अलमारी बनाने का काम कर रहे थे। शनिवार को दोनों पल्सर बाइक (सीजी 10-2839) से दीपावली मनाने गांव लौट रहे थे। दोपहर करीब 2 बजे लोखंडी और तुर्काडीह के बीच मोड़ पर उनकी बाइक सामने से आ रहे ट्रेलर (सीजी 10 बीजेड 6748) से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि साहीन ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
इसी दौरान वहां से गुजर रहे पड़ोसी शिक्षक गज्जू ओग्रे ने दोनों भाइयों को पहचान लिया। सूचना पर 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल रितेश को रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल के पास मौजूद एक युवक ने ट्रेलर का नंबर नोट कर लिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार चालक और ट्रेलर की तलाश शुरू कर दी है। बाइक रितेश चला रहा था।
सिम्स के बजाय रतनपुर ले गई एंबुलेंस, इलाज में देरी पर सवाल
इस हादसे में दूसरे भाई की मौत के बाद एंबुलेंस की रूटिंग और समय पर उपचार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पड़ोसी गज्जू ओग्रे के अनुसार, हादसे के करीब 20 मिनट बाद दोपहर 2:15 बजे 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची थी। उस समय रितेश जीवित था और गंभीर हालत में था। आरोप है कि घटनास्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित सिम्स ले जाने के बजाय एंबुलेंस उसे लगभग 25 किलोमीटर दूर रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। वहां से सिम्स रेफर किए जाने के बाद उसे बिलासपुर लाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ घंटे लग गए। परिजनों और स्थानीय लोगों के मन में सवाल है कि यदि घायल को सीधे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जाता तो क्या उसकी जान बच सकती थी? हालांकि, इस संबंध में एंबुलेंस की रूटिंग और उपचार में हुई देरी की आधिकारिक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।
बड़ा भाई था परिवार का इकलौता सहारा
दोनों भाइयों के माता-पिता की बीमारी के कारण पहले ही मौत हो चुकी थी। परिवार में दादा-दादी, छोटा भाई अन्नू और बड़ी बहन ज्योति हैं। बहन की शादी हो चुकी है। दोनों भाई छोटे भाई के साथ दादा-दादी के पास रहते थे। बड़ा भाई रितेश काम करके परिवार का खर्च चलाता था। दीपावली पर घर लौट रहे दोनों भाइयों की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। हादसे ने दादा-दादी से उनके पोतों और छोटे भाई से दोनों बड़े भाइयों का सहारा छीन लिया।
जिले में एक साल में 1170 हादसे, 333 लोगों की मौत
सड़क हादसों में हेलमेट नहीं पहनना भी जानलेवा साबित हो रहा है। हादसे के समय दोनों भाइयों ने हेलमेट नहीं पहना था। उनके सिर में गंभीर चोटें आईं और काफी खून बह गया। प्रारंभिक तौर पर सिर में लगी चोट और अत्यधिक रक्तस्राव को मौत की वजह माना जा रहा है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच जिले में 1170 सड़क हादसे हुए, जिनमें 333 लोगों की जान गई। इनमें 233 मौतें बिना हेलमेट बाइक चलाने से जुड़ी थीं। यानी सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में करीब 70 प्रतिशत मौतें इस श्रेणी में दर्ज की गईं।
जिले की आउटर सड़कों पर बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के खिलाफ नियमित चालानी कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन दीपावली के नजदीक आते ही पुलिस ने कुछ दिनों के लिए इस कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। ऐसे में यह हादसा एक बार फिर हेलमेट की अनदेखी और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गया है।